February 17, 2026
Unregistered Will Still Valid: Law Grants Equal Property Rights to Daughters in Inheritance Cases

Unregistered Will Still Valid: Law Grants Equal Property Rights to Daughters in Inheritance Cases

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परिवारों में संपत्ति विवाद तेजी से बढ़ रहे हैं, खासकर तब जब माता-पिता स्पष्ट या रजिस्टर्ड वसीयत छोड़कर नहीं जाते। अक्सर पिता की मृत्यु के बाद सबसे बड़ा सवाल उठता है — अगर वसीयत नहीं है तो संपत्ति पर पहला अधिकार किसका होगा? और यदि वसीयत है लेकिन रजिस्टर्ड नहीं, तो क्या वह कानूनी रूप से मान्य होगी?

भारतीय कानून इन सवालों के स्पष्ट जवाब देता है, लेकिन कई लोग नियमों से अनजान रहते हैं। ऐसे मामलों में दो प्रमुख कानून लागू होते हैं — इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1925 और हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 — जो तय करते हैं कि संपत्ति कानूनी वारिसों में कैसे बंटेगी।

अक्सर यह भी भ्रम रहता है कि बेटियों को संपत्ति में कम अधिकार मिलता है। लेकिन हिंदू सक्सेशन (संशोधन) एक्ट, 2005 के बाद बेटियों को बेटों के बराबर कानूनी अधिकार मिल चुके हैं। उन्हें वसीयत होने या न होने, दोनों ही स्थितियों में संपत्ति से अनुचित रूप से वंचित नहीं किया जा सकता।

यदि पिता बिना वसीयत के मृत्यु को प्राप्त होते हैं, तो इसे ‘इंटेस्टेट डेथ’ कहा जाता है। ऐसी स्थिति में संपत्ति सभी क्लास-I कानूनी वारिसों में बराबर बांटी जाती है। आमतौर पर इसमें बेटे, बेटियां और जीवित होने पर मां शामिल होती हैं। किसी एक संतान को प्राथमिकता नहीं मिलती।

कई लोग मानते हैं कि बिना रजिस्ट्रेशन की वसीयत अमान्य होती है, लेकिन भारतीय कानून में वसीयत का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं है। यदि वसीयत सही तरीके से लिखी गई हो, हस्ताक्षरित हो, गवाहों की मौजूदगी में बनाई गई हो और उस पर दबाव या धोखाधड़ी न हो, तो अदालत उसे मान्य मान सकती है।

कभी-कभी वसीयत में केवल कुछ संपत्तियों का उल्लेख होता है। ऐसी ‘आंशिक वसीयत’ में जिन संपत्तियों का जिक्र है, उनका बंटवारा वसीयत के अनुसार होता है, जबकि बाकी संपत्ति कानूनी वारिसों में बराबर बांटी जाती है।

कुल मिलाकर कानून तीन बातें स्पष्ट करता है — बिना रजिस्ट्रेशन की वसीयत भी वैध हो सकती है, बेटियों के बराबर अधिकार हैं, और वसीयत न होने पर संपत्ति सभी कानूनी वारिसों में समान रूप से बांटी जाती है। विशेषज्ञ समय रहते स्पष्ट वसीयत बनाने की सलाह देते हैं ताकि भविष्य में विवाद न हो।

अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य कानूनी जानकारी के लिए है। किसी विशेष मामले में उचित सलाह के लिए विधि विशेषज्ञ से परामर्श लें।

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