January 29, 2026
Raksha Bandhan 2025: Will It Be Celebrated on August 8 or 9? Know the Correct Date and Significance of Rakhi

Raksha Bandhan 2025: Will It Be Celebrated on August 8 or 9? Know the Correct Date and Significance of Rakhi

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भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षा बंधन हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, जबकि भाई बहन की रक्षा का संकल्प लेते हैं। लेकिन इस बार रक्षा बंधन की तारीख को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कुछ पंचांगों में यह 8 अगस्त 2025 को बताया जा रहा है, जबकि कुछ में 9 अगस्त को। ऐसे में जानिए इस बार राखी का पर्व कब और किस शुभ मुहूर्त में मनाया जाएगा।

रक्षा बंधन 2025 की सही तारीख और मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, श्रावण पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 8 अगस्त 2025 को शाम 03:03 बजे होगी और यह समाप्त होगी 9 अगस्त 2025 को शाम 05:59 बजे। ऐसे में राखी बांधने का सबसे उपयुक्त समय 9 अगस्त को माना जा रहा है, क्योंकि उस दिन पूरा दिन पूर्णिमा तिथि उपलब्ध रहेगी।

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त (9 अगस्त 2025):
🔸 प्रातःकाल 06:00 बजे से शाम 05:30 बजे तक (स्थानीय मुहूर्त के अनुसार अंतर संभव है)
🔸 इस दिन भद्रा काल नहीं है, इसलिए पूरे दिन राखी बांधना शुभ रहेगा।

रक्षा बंधन का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

रक्षा बंधन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भावनाओं और विश्वासों की डोर है जो भाई-बहन को जोड़ती है। इस दिन बहनें राखी बांधते समय तिलक करती हैं, आरती उतारती हैं और मिठाई खिलाती हैं। बदले में भाई उन्हें उपहार देते हैं और हर परिस्थिति में उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं।

पुराणों के अनुसार, देव-दानव युद्ध के समय इंद्राणी (इंद्र की पत्नी) ने इंद्र की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा था जिससे वे युद्ध में विजयी हुए। तब से यह परंपरा चली आ रही है।

निष्कर्ष

रक्षा बंधन 2025 में 9 अगस्त को मनाना अधिक उचित है, क्योंकि उस दिन पूर्णिमा तिथि पूरे दिन रहेगी और शुभ मुहूर्त भी उपलब्ध है। यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते को और भी प्रगाढ़ बनाता है। तो इस बार कीजिए तैयारी प्यार, विश्वास और रक्षा के इस अनमोल पर्व की।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह लेख आम जानकारी पर आधारित है और विभिन्न पंचांगों व ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार तैयार किया गया है। तिथि और मुहूर्त स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी धार्मिक कार्य से पहले स्थानीय पंचांग या विश्वसनीय पंडित से परामर्श अवश्य लें।

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