Why Is Liquor Cheaper at Airports? The Reason Will Surprise You!
आपने शायद गौर किया होगा कि देश-विदेश के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स पर मौजूद ड्यूटी-फ्री शॉप्स में शराब की कीमतें बाजार से कहीं कम होती हैं। जबकि एयरपोर्ट पर बाकी हर चीज़ महंगी होती है—तो फिर शराब इतनी सस्ती क्यों?
इस सवाल का जवाब सिर्फ एक लाइन में नहीं दिया जा सकता। इसके पीछे कई आर्थिक, कर-नीतिगत और व्यापारिक कारण छिपे हैं। आइए विस्तार से समझते हैं:
1. करों से पूरी छूट
ड्यूटी-फ्री दुकानों का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि वहां से खरीदी गई वस्तुएं स्थानीय और राष्ट्रीय टैक्सों से मुक्त होती हैं। इसमें शामिल हैं – वैट, जीएसटी, सेल्स टैक्स, कस्टम ड्यूटी और एक्साइज टैक्स। चूंकि ये सामान अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान “एक्सपोर्ट” माने जाते हैं, इस पर घरेलू कर नहीं लगाए जाते।
2. एक्साइज ड्यूटी नहीं लगती
भारत में शराब पर सबसे ज़्यादा बोझ एक्साइज ड्यूटी का होता है, जो राज्य सरकारें लगाती हैं। लेकिन ड्यूटी-फ्री शॉप्स में यह लागू नहीं होती, जिससे कीमतों में 30% से 70% तक की कमी आ सकती है।
3. थोक खरीद और खास डील्स
एयरपोर्ट की ड्यूटी-फ्री रिटेल कंपनियां ब्रांड्स से थोक में खरीददारी करती हैं। इससे उन्हें स्पेशल रेट्स और एक्सक्लूसिव डील्स मिलती हैं, जो सामान्य दुकानों के मुकाबले सस्ती होती हैं।
4. विदेश में टैक्स ज़्यादा, इसलिए ड्यूटी-फ्री में फायदा ज्यादा
कुछ देशों में शराब पर टैक्स 25-30% तक होता है। ऐसे में अगर कोई विदेशी यात्री ड्यूटी-फ्री से वही ब्रांड खरीदे, तो उसे घरेलू कीमत के मुकाबले काफी बचत हो सकती है।
5. ड्यूटी-फ्री मतलब हमेशा सस्ता नहीं
हालांकि शराब पर आमतौर पर बचत होती है, पर हर सामान ड्यूटी-फ्री में सस्ता हो—ऐसा ज़रूरी नहीं। कुछ ब्रांडेड परफ्यूम, घड़ियां और चॉकलेट्स पर मार्केटिंग के नाम पर भारी मार्जिन जोड़ा जाता है। इसलिए समझदारी से तुलना करना जरूरी है।
6. खरीद की सीमा
भारत लौटते समय आप अधिकतम 2 लीटर शराब तक ही ड्यूटी-फ्री ला सकते हैं। इससे अधिक मात्रा पर कस्टम ड्यूटी लग सकती है, जो फायदे को खत्म कर देती है।
7. क्या सचमुच फायदे का सौदा है?
- यदि आप ब्रांड और देश की तुलना कर लें तो ड्यूटी-फ्री शराब खरीदना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है।
- लेकिन सिर्फ “ड्यूटी-फ्री” का टैग देखकर खरीदारी करना घाटे का सौदा भी बन सकता है।
निष्कर्ष:
एयरपोर्ट पर शराब इसलिए सस्ती होती है क्योंकि उस पर टैक्स और ड्यूटी नहीं लगती। साथ ही, डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर होने वाली थोक डील्स और अंतरराष्ट्रीय नियमों के चलते इसकी कीमत बाजार से काफी कम हो जाती है। लेकिन हर बार यह जरूरी नहीं कि ड्यूटी-फ्री मतलब सबसे सस्ती—थोड़ा होशियारी ज़रूरी है!
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