January 19, 2026
Rasgulla – India’s Sweet That’s Not Just a Dessert, but a Cultural Icon

Rasgulla – India’s Sweet That’s Not Just a Dessert, but a Cultural Icon

Share This News

अगर भारत की मिठाइयों में कोई ऐसा नाम है जो हर किसी के मन को मोह लेता है, तो वह है रासगुल्ला। अंग्रेज़ी में इसे “सिरप भरा पनीर का गोला” कहा जाता है। यह ताजा छेना से बना, चीनी के हल्के सिरप में उबला गया गोल मीठा है, जो स्पंजी, रसीला और हल्का मीठा होता है। एक बार चखो, तो मुँह में घुलकर दिल को भी खुश कर देता है।

रासगुल्ला का इतिहास: बंगाल बनाम ओडिशा
रासगुल्ला का जन्मस्थल लेकर बंगाल और ओडिशा दोनों राज्यों में जंग मची हुई है। ओडिशा का पहाड़ा रासगुल्ला और बंगाल का बंगालर रसमलाई दोनों को GI टैग प्राप्त है, जो इस मिठाई की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक अहमियत को दिखाता है। तो अगली बार जब आप इसे खाएं, सोचिए कि आप इतिहास का स्वाद ले रहे हैं!

रासगुल्ला कैसे बनता है: आसान स्टेप्स

  1. छेना तैयार करना – सबसे पहले फुल क्रीम दूध को उबालें और उसमें नींबू का रस या सिरका डालकर फाड़ दें। फिर दूध के ठोस हिस्से को मलमल के कपड़े में छानकर पानी से धो लें ताकि खट्टापन दूर हो जाए। इसे लगभग 30 मिनट के लिए लटकाएँ ताकि मुलायम छेना तैयार हो।
  2. रासगुल्ला का आटा गूंधना
    छेना को हाथों से चिकना और मुलायम गूंधें। अगर जरूरत हो तो थोड़ी सूजी मिलाकर मिश्रण बांधें। अब इसे छोटे, गोल और बिना दरार वाले गोले बनाएं। चिकने गोले रासगुल्ला को स्पंजी और मुलायम बनाते हैं।
  3. चीनी का सिरप तैयार करना
    गहरे बर्तन में पानी और चीनी मिलाकर उबालें। सिरप बहुत गाढ़ा नहीं होना चाहिए। इससे गोले पकते समय बढ़ेंगे और मिठास सोख लेंगे।
  4. रासगुल्ला पकाना
    तैयार गोलों को उबलते सिरप में डालें। ढककर 15–20 मिनट तक पकाएं। गोले आकार में दोगुने और नरम, रसीले तथा स्पंजी हो जाएंगे। यह चरण असली रासगुल्ला बनाने की कुंजी है।
  5. ठंडा करना और परोसना
    रासगुल्ला को सिरप में ठंडा होने दें ताकि मिठास और अच्छी तरह से अंदर तक जाए। ठंडा परोसने पर इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। यह त्योहारों और विशेष अवसरों पर सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला भारतीय मिठा है।

रोचक बातें जो शायद आप नहीं जानते

उत्पत्ति का विवाद – रासगुल्ला का दावा बंगाल और ओडिशा दोनों करते हैं, जिससे यह केवल मिठा नहीं बल्कि सांस्कृतिक गर्व का प्रतीक भी बन गया है।

GI टैग – दोनों राज्यों के रासगुल्ला को GI टैग प्राप्त है, जो इसकी प्रामाणिकता और सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा करता है।

विशेष बनावट – रासगुल्ला नरम, स्पंजी और रसीला होता है। इसकी बनावट ताजे पनीर के गोले को सही समय तक सिरप में उबालकर बनाई जाती है।

विभिन्न प्रकार – राजभोग, कमला भोग और रस मलाई जैसी कई किस्में मौजूद हैं, जिनमें स्वाद, बनावट या स्टफिंग अलग होती है।

वैश्विक लोकप्रियता – आज रासगुल्ला दुनिया भर के भारतीय रेस्तरां में परोसा जाता है और अंग्रेज़ी मेनू में इसे “Indian cottage cheese dumplings in syrup” के रूप में लिखा जाता है।

तो अगली बार जब आप रासगुल्ला खाएं, याद रखिए कि यह सिर्फ मीठा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, इतिहास और प्यार का स्वाद भी है।

Leave a Reply