Maharashtra’s meteor-formed Lonar Lake changes color, attracts tourists
बुलढाणा (महाराष्ट्र): रोमांच, इतिहास और प्रकृति प्रेमियों के लिए महाराष्ट्र एक से बढ़कर एक जगहों से भरा हुआ है। इन्हीं में से एक है लोनार झील, जो अपने वैज्ञानिक रहस्य, ऐतिहासिक महत्व और सुंदर प्राकृतिक वातावरण के कारण तेजी से लोकप्रिय पर्यटन स्थल के रूप में उभर रही है। बुलढाणा जिले में स्थित यह झील, समुद्र तल से लगभग 1,200 मीटर की ऊंचाई पर लोनार गांव के पास स्थित है।
52,000 साल पुराना उल्कापात बना झील का कारण
लोनार झील की सबसे बड़ी खासियत है इसका उल्कापिंड से बना होना। वैज्ञानिकों के अनुसार, लगभग 52,000 साल पहले एक विशाल उल्कापिंड पृथ्वी से टकराया था, जिससे बना क्रेटर बाद में पानी से भर गया और यह झील बनी। यह पूरी प्रक्रिया इतनी शक्तिशाली थी कि इसके प्रभाव से लाखों टन ऊर्जा का उत्सर्जन हुआ था।
आज भी यह झील भूगर्भ वैज्ञानिकों और खगोल वैज्ञानिकों के शोध का विषय बनी हुई है।

रहस्यमय झील: दो रंगों वाला पानी और अद्भुत जैव विविधता
करीब 1.2 किलोमीटर की परिधि और लगभग 150 मीटर की गहराई वाली लोनार झील अपने रहस्यमयी स्वरूप के लिए जानी जाती है।
झील का पानी दो रंगों में दिखाई देता है – कभी गुलाबी, तो कभी हरा। यह परिवर्तन मौसम, जल में उपस्थित सूक्ष्मजीवों, और झील की रासायनिक संरचना पर निर्भर करता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि झील के पानी में उच्च मात्रा में नमक, क्लोराइड, और सोडियम पाया जाता है, जो इसे अन्य झीलों से भिन्न बनाता है। इसके साथ ही यहां हल्के क्षारीय और खारे पानी वाले दो अलग-अलग जलस्तर मौजूद हैं, जो एक ही झील में बहुत ही दुर्लभ घटना है।
आंखों को भ्रमित करने वाला नजारा
झील का रंग और उसका शांत वातावरण अक्सर पर्यटकों को भ्रमित कर देता है। यह झील जैसी दिखती है, वैसी है नहीं – इसकी परतों के नीचे छिपे कई वैज्ञानिक और प्राकृतिक रहस्य आज भी अनसुलझे हैं। झील की गहराई और आसपास के जंगलों में कई प्राकृतिक वनस्पतियां और पक्षियों की प्रजातियां देखने को मिलती हैं, जिससे यह जगह बर्ड वॉचिंग और ट्रैकिंग के लिए भी उपयुक्त है।
धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का भी है संगम
लोनार झील ( Lonar Lake )केवल प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ही नहीं, बल्कि इसके पास मौजूद प्राचीन मंदिरों के कारण भी प्रसिद्ध है।

दैत्यसूदन मंदिर – यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और इसके स्थापत्य में चालुक्य युग की झलक मिलती है।

गोमुख मंदिर – यह मंदिर झील से एक जलधारा के साथ जुड़ा हुआ है, जिसे पवित्र माना जाता है।
इसके अलावा झील के किनारे कई प्राचीन अवशेष और मूर्तियां देखी जा सकती हैं, जो इस क्षेत्र के इतिहास और संस्कृति को दर्शाते हैं।
पर्यटन के लिए अनुकूल समय
पर्यटक लोनार झील सालभर देख सकते हैं, लेकिन यदि आप झील के पानी के बदलते रंग और प्राकृतिक सौंदर्य का पूरा आनंद लेना चाहते हैं, तो अक्टूबर से फरवरी का समय सबसे अच्छा माना जाता है। इस दौरान मौसम ठंडा और खुशनुमा रहता है, जिससे घूमने में आसानी होती है।
लोनार झील तक कैसे पहुंचे?
हवाई मार्ग:
सबसे नजदीकी एयरपोर्ट औरंगाबाद है, जो लोनार से 135 किमी दूर स्थित है। वहां से टैक्सी या लोकल बस द्वारा लोनार पहुंचा जा सकता है।
रेल मार्ग:
निकटतम रेलवे स्टेशन मलकापुर है, जो झील से लगभग 90 किमी दूर है। मलकापुर स्टेशन महाराष्ट्र के कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।
सड़क मार्ग:
लोनार झील सड़क मार्ग से भी अच्छी तरह जुड़ी हुई है। पर्यटक अपनी निजी गाड़ी, टैक्सी या सरकारी बस सेवा से यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। बुलढाणा, औरंगाबाद, अकोला और जलगांव जैसे शहरों से झील के लिए नियमित बस सेवाएं उपलब्ध हैं।
पर्यटकों के लिए सलाह
यदि आप अपने साथी के साथ किसी शांत, अनोखी और प्राकृतिक जगह की तलाश में हैं, तो लोनार झील एक आदर्श गंतव्य हो सकती है। यहां आपको ना सिर्फ शांति और हरियाली मिलेगी, बल्कि विज्ञान और इतिहास का अद्भुत संगम भी देखने को मिलेगा।
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