भारत में हिल स्टेशनों की बात हो और नैनीताल का नाम न आए, ऐसा संभव नहीं। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में लगभग 2,000 मीटर की ऊंचाई पर बसा यह शहर, अपनी नैनी झील और सात पहाड़ियों के कारण ‘लेक सिटी’ यानी ‘झीलों का शहर’ के नाम से प्रसिद्ध है।
पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा है शहर का नाम
नैनीताल का नाम ‘नैना’ (आंख) और ‘ताल’ (झील) से मिलकर बना है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह वही स्थान है जहां देवी सती की आंखें गिरी थीं, जिसके बाद यहां नैना देवी मंदिर की स्थापना हुई। यह स्थान 64 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।
स्कंद पुराण में भी है उल्लेख
‘स्कंद पुराण’ के मानस खंड में नैनीताल को ‘त्रि-ऋषि सरोवर’ कहा गया है। मान्यता है कि अत्रि, पुलस्त्य और पुलह ऋषि यहां तपस्या के लिए आए थे और पानी की आवश्यकता होने पर उन्होंने मानसरोवर झील से जल लाकर एक गड्ढे में भर दिया था, जो आगे चलकर नैनी झील बना।

झीलों से भरा शहर
नैनीताल को ‘लेक सिटी’ कहा जाता है क्योंकि यहां सात प्रमुख झीलें स्थित हैं:
- नैनी झील
- भीमताल
- नौकुचियाताल
- खुरपाताल
- सत्तल
- सरियाताल
- गरुड़ ताल
इन झीलों की खूबसूरती, हरे-भरे पहाड़ों के बीच रंग-बिरंगी नावों की चहल-पहल और शांत वातावरण पर्यटकों को यहां खींच लाते हैं।

ब्रिटिश काल से शुरू हुआ पर्यटन का सिलसिला
इतिहास के अनुसार, ब्रिटिश हुकूमत ने 1815 में कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र पर अधिकार कर लिया था। 1839 में अंग्रेज व्यापारी पी. बैरन यहां शिकार के दौरान रास्ता भटककर पहुंचे और नैनी झील की सुंदरता से प्रभावित होकर यहीं बस गए। उन्होंने झील के किनारे यूरोपीयन कॉलोनी की स्थापना की, और 1841 से यह स्थान एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने लगा। 1847 तक नैनीताल दुनियाभर में मशहूर हो चुका था।
अंग्रेजों का समर कैपिटल और शिक्षा का केंद्र
ब्रिटिश काल में नैनीताल को यूनाइटेड प्रोविंसेज का गर्मी का राजधानी (Summer Capital) घोषित किया गया था। अंग्रेजों ने यहां सुंदर बंगले, चर्च, क्लब और सरकारी कार्यालय बनवाए। नैनीताल जल्द ही शिक्षा के केंद्र के रूप में भी उभरने लगा, जहां देशभर से छात्र पढ़ाई के लिए आने लगे।
आज भी है आकर्षण का केंद्र
नैनीताल आज भी अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, पौराणिक महत्व और शांत वातावरण के कारण देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। यहां आने वाले लोग न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेते हैं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक आस्था से भी जुड़ते हैं।
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