ऑफिस टाइम के बाद ट्रेनिंग? कोर्ट ने माना ओवरटाइम, कर्मचारी को मिला ₹2.3 लाख का मुआवजा
चीन में एक इंजीनियर ने ऑफिस समय के बाद जबरन कराई जा रही ऑनलाइन ट्रेनिंग्स के खिलाफ बड़ा मुकदमा जीत लिया है। बीजिंग की अदालत ने इसे ओवरटाइम माना और कंपनी को 2.3 लाख रुपये (19,000 युआन) मुआवजा देने का आदेश दिया। यह फैसला चीन की कार्यस्थल नीतियों में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
बीजिंग के रहने वाले वांग नाम के इंजीनियर ने अदालत को बताया कि जुलाई 2020 से जून 2023 तक नौकरी के दौरान उन्हें लगातार ऑफिस टाइम के बाद ऑनलाइन सेशन्स में हिस्सा लेने के लिए मजबूर किया गया। इन ट्रेनिंग्स में शामिल न होने पर कंपनी की तरफ से 200 युआन (करीब ₹2,400) की ‘स्वैच्छिक डोनेशन’ के रूप में जुर्माना लगाया जाता था।
जब वांग ने इसके लिए ओवरटाइम का भुगतान मांगा तो कंपनी ने इसे मानने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि सेशन्स को मैनेजमेंट की अनुमति प्राप्त नहीं थी और कर्मचारियों को केवल लॉगिन करना होता था, भागीदारी अनिवार्य नहीं थी। वांग ने कुल 80,000 युआन (लगभग ₹9.6 लाख) का ओवरटाइम मांगा था।
पहले मध्यस्थ संस्था ने वांग की अपील खारिज कर दी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और मामला कोर्ट में पहुंचाया। बीजिंग नंबर 2 इंटरमीडिएट पीपल्स कोर्ट ने वांग के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने माना कि काम के बाद की गई ट्रेनिंग अनिवार्य थी और ‘डोनेशन’ असल में एक दंड था। ऐसे में इसे पूरी तरह ओवरटाइम माना जाएगा।
इस ऐतिहासिक फैसले में अदालत ने कंपनी को वांग को 19,000 युआन यानी करीब ₹2.3 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया। यह निर्णय चीन में वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर एक अहम मिसाल बन गया है।
