February 18, 2026
Pitru Paksha 2025: Why Are New Ventures and Investments Considered Inauspicious? Know the Scientific and Astrological Reasons

Pitru Paksha 2025: Why Are New Ventures and Investments Considered Inauspicious? Know the Scientific and Astrological Reasons

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पितृ पक्ष हिंदू धर्म में पूर्वजों को समर्पित एक विशेष अवधि है। इस दौरान लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान करते हैं। लेकिन इस पखवाड़े में एक परंपरा और भी जुड़ी हुई है—नए काम, विवाह, गृह प्रवेश, निवेश या शुभ कार्यों की शुरुआत को अशुभ माना जाता है। आखिर क्यों है ऐसा? क्या इसके पीछे केवल धार्मिक मान्यता है या कोई वैज्ञानिक कारण भी है? आइए जानते हैं विस्तार से।

ज्योतिषीय मान्यता: चंद्रमा का प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पितृ पक्ष के दिनों में चंद्रमा की स्थिति ऐसी होती है कि उसका सीधा असर मन और विचारों पर पड़ता है। वेदों में भी कहा गया है—“चंद्रमा मनसो जातः” यानी चंद्रमा मन से उत्पन्न हुआ है और इसलिए मन को प्रभावित करता है।

  • इस अवधि में मानसिक स्थिरता कम हो जाती है।
  • नए कामों में जल्दबाजी और गलत फैसले लेने की संभावना अधिक रहती है।
  • यही कारण है कि इस समय बड़े फैसले और निवेश से परहेज करने की परंपरा चली आ रही है।

वैज्ञानिक कारण: शरीर में जल और चंद्रमा का खिंचाव

धार्मिक मान्यता के अलावा वैज्ञानिक पहलू भी दिलचस्प है।

  • मानव शरीर का लगभग 70% हिस्सा पानी से बना है।
  • समुद्र में ज्वार-भाटा की तरह, चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण जल पर असर डालता है।
  • वैज्ञानिक मानते हैं कि इसका असर मानव शरीर और दिमाग पर भी होता है।
  • पितृ पक्ष के दौरान मानसिक अस्थिरता, भ्रम और भावनात्मक उतार-चढ़ाव अधिक देखे जाते हैं।

इस वजह से बड़े निवेश या जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय लेने का समय उपयुक्त नहीं माना जाता।

पुराणिक संदर्भ

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार पितृ पक्ष पूर्वजों को याद करने और उनकी कृपा पाने का समय है।

  • इस काल को श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है।
  • मान्यता है कि पितरों की आत्मा इस दौरान धरती पर आती है और अपने वंशजों से तर्पण व आशीर्वाद का आदान-प्रदान करती है।
  • इस समय अगर कोई नया काम शुरू किया जाए तो उसमें विघ्न आ सकते हैं क्योंकि ऊर्जा का केंद्र पूर्वजों के प्रति समर्पण में होना चाहिए, न कि भौतिक उपलब्धियों में।

नया काम क्यों वर्जित माना जाता है?

  1. निर्णय क्षमता पर असर – मन स्थिर न होने से बड़े फैसलों में गलतियां हो सकती हैं।
  2. नकारात्मक ऊर्जा – यह समय शुभ कार्यों की बजाय आत्मचिंतन और पितृ पूजन के लिए माना गया है।
  3. परंपरा और सामाजिक मान्यता – पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा के चलते इसे आज भी पालन किया जाता है।

क्या करें इस दौरान?

  • नया काम शुरू करने से बचें।
  • अपने विचारों और योजनाओं को परखें।
  • पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान करें।
  • इस समय को आत्ममंथन, अध्ययन और आध्यात्मिक साधना के लिए इस्तेमाल करें।

निष्कर्ष

पितृ पक्ष को केवल अंधविश्वास मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं होगा। इसमें छिपे ज्योतिषीय और वैज्ञानिक कारण दोनों ही हमें बताते हैं कि क्यों इस अवधि को नए कामों के लिए अनुपयुक्त माना गया है। दरअसल यह समय जीवन की भागदौड़ रोककर, पूर्वजों को याद करने और खुद के भीतर झांकने का अवसर देता है।

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