January 19, 2026
Not Just for Décor — Mind the Direction Before Placing a Mirror!

Not Just for Décor — Mind the Direction Before Placing a Mirror!

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फेंग शुई के अनुसार, दर्पण केवल सजावटी तत्व नहीं, बल्कि वह Chi (ऊर्जा) को नियंत्रित करने वाले शक्तिशाली उपकरण भी हैं। सही दिशा व स्थान पर मिरर लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत होता है और घर में समृद्धि, शांति व मंगलमय वातावरण बनता है।

उत्तर और पूर्व दिशा:

आदर्श दिशा दर्पण के लिए: घर में उत्तर या पूर्व दिशा की दीवारों पर दर्पण लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। ये दिशाएं सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि से जुड़ी होती हैं।

धनवृद्धि में सहायक: इन दिशाओं की ओर लगे दर्पण घर में सकारात्मक ऊर्जा और धन आकर्षित करने में मदद कर सकते हैं।

दक्षिण और पश्चिम दिशा:

दर्पण से बचें: दक्षिण या पश्चिम दिशा की दीवारों पर दर्पण लगाने से बचना चाहिए। ये दिशाएं नकारात्मक ऊर्जा से जुड़ी मानी जाती हैं और इससे घर में आर्थिक या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

उपाय: यदि इन दिशाओं में दर्पण लगाना आवश्यक हो, तो ध्यान रखें कि दर्पण मुख्य द्वार या किसी नकारात्मक वस्तु की सीधी छवि न दिखाए।

इस जगह मिरर लगाना करियर, खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा लाता है

१. प्रवेश द्वार (Entryway / Foyer)

मिरर को सीधे फ्रंट डोर के सामने न लगाएँ, क्योंकि यह Positivity को वापस बाहर भेज सकता है। इसकी जगह दीवार पर 90° के कोण पर मिरर लगाना उत्तम माना जाता है। इससे प्रवेश के समय सकारात्मक ऊर्जा घर के भीतर बनी रहती है। 

प्रवेश क्षेत्र की दीवार पर प्रकृति-दृश्य या सुंदर सजावट प्रतिबिंबित होती मिरर आकर्षक व स्वागतभाव वाला माहौल बनाता है। 

२. बैठक कक्ष (Living Room)

बड़ी खिड़की के सामने मिरर लगाकर प्राकृतिक रोशनी को प्रमुख स्थान तक पहुंचाया जा सकता है तथा कम जगह भी विशाल प्रतीत होती है। 
मिरर को क्लटर या तेज कोण वाले फर्नीचर की ओर प्रतिबिंबित न होने दें—इससे ऊर्जा अव्यवस्थित या नकारात्मक हो सकती है। 

३. भोजन कक्ष (Dining Room)

डायनिंग टेबल की ओर मिरर रखना समृद्धि (doubles food symbolically) और पारिवारिक रिश्तों में गहराई लाने का प्रतीक है। 

लेकिन ध्यान रखें कि प्रतिबिंब साफ़ और सकारात्मक हो—कुचड़ या अव्यवस्था से बचें। 

४. गृह कार्यालय (Home Office)

दर्पण (Mirror) को ऐसे स्थान पर रखें जहाँ वह प्रवेश-द्वार को प्रतिबिंबित करे—यह कार्यक्षेत्र में नियंत्रण व चेतना को बढ़ाता है। 

डेस्क के सामने सीधे मिरर न रखें—इससे काम की जिम्मेदारी “दोगुनी” हो सकती है, जिससे तनाव बढ़ सकता है। 

यह स्थान हैं असामंजस्यपूर्ण—जहां मिरर न लगाएँ

  • बिस्तर की सीधी दिशा (Bedroom opposite bed)

मिरर को बैडरूम में बिस्तर की दिशा में लगाना वर्जित है—यह नींद को प्रभावित कर सकता है, बेचैनी, बेचैनी या असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो सकती है। 

सीधी या खिड़की की सतह पर मिरर न लगाएँ, न ही ड्रेसर के ऊपरी हिस्से में—यह सपने में दर्पण प्रतिबिंब का प्रभाव डालकर नींद भंग करता है। 

  • मुख्य द्वार के ठीक सामने (Door-facing mirror)

यदि मिरर सीधे मुख्य द्वार के सामने हो, तो यह आने वाली सकारात्मक ऊर्जा को लौटाकर उसे प्रवेश से रोक सकता है। इसे संतुलित करने हेतु मिरर को थोड़ा कोण पर, या दीवार के किनारे पर लगाना चाहिए। 

  • दो मिरर आपस में आमने-सामने (Mirrors facing each other)

मिरर यदि एक-दूसरे को सीधे प्रतिबिंबित करें, तो ऊर्जा बहुपरावर्तन (multiple reflections) होने पर अतिचलन, भ्रम और तनाव बढ़ाने लगा सकता है।

  • रसोई क्षेत्र (Kitchen)

मिरर को ऐसा जगह न रखें जहाँ वह स्टोव, खुले ज्वाला या गंदा इलाका प्रतिबिंबित करे। यह ऊर्जा संतुलन बिगाड़ सकता है। कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर रसोई में प्रवेश मार्ग नहीं दिखता तो मिरर उपयोगी हो सकता है, लेकिन यह अपवाद मात्र है।  लेकिन आमतौर पर, रसोई में प्रतिबिंबित उग्रता व अनागोंछनीयता से बचना चाहिए। –

मिरर लगाने से पहले ध्यान देने योग्य कुछ अन्य बातें

आकार एवं आकार: धोखा देने वाले, टूटे, छोटे मिरर से बचें। एक निरंतर, स्पष्ट प्रतिबिंब वाला आयताकार या वर्गाकार मिरर श्रेष्ठ है। 

फ्रेमिंग: मिरर को अच्छी फ्रेम में लगाएं—बिना फ्रेम वाले मिरर ऊर्जा को अव्यवस्थित कर सकते हैं। 

सफाई: धूल या दरारों वाले मिररों को समय-समय पर साफ करें या बदलें—क्योंकि खराब मिरर सफलता, संबंध, स्वास्थ्य आदि में बाधा कर सकते हैं। 

संयम से उपयोग करें: किसी एक कमरे में बहुत अधिक मिरर न लगाएँ—यह उर्जा अनुशासित और स्थिर रखने में सहायक नहीं है। –

निष्कर्ष ( Conclusion )

वास्तु शास्त्र के अनुसार, दर्पणों को सही दिशा में लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और सामंजस्य में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। दर्पण न केवल रोशनी को बढ़ाते हैं और स्थान को बड़ा दिखाते हैं, बल्कि वास्तु दोषों को भी सुधारने में सहायक होते हैं।

हालांकि, दर्पणों को गलत दिशा में लगाने से नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक अशांति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए उत्तर या पूर्व दिशा में दर्पण लगाना, बेड या मुख्य द्वार की सीधी छवि से बचना, और दर्पण को हमेशा साफ व बिना टूट-फूट के रखना अत्यंत आवश्यक है।

सही दिशा और देखभाल के साथ दर्पण न केवल घर की सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि सुख-समृद्धि और मानसिक शांति को भी बढ़ावा देते हैं।

बचें: बिस्तर सामने, मुख्य द्वार सामने, mirrors facing each other, और रसोई में प्रतिकूल प्रतिबिंब

सावधानियां: साफ, फ्रेम वाला, टूटे-फ़टे से मुक्त मिरर उपयोग करें; एक कमरे में सीमित संख्या में रखें

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी पर आधारित है और इसका उद्देश्य किसी प्रकार की आध्यात्मिक, वास्तुशास्त्रीय या फेंगशुई मान्यताओं को प्रमाणित करना नहीं है। इस विषय से जुड़े किसी भी निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।

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