Cash Transaction Rules in India: What’s Allowed, What’s Banned, and Where Penalties Apply
भारत में रोज़मर्रा की ज़िंदगी में नकद (कैश) का इस्तेमाल अब भी आम है। किराने का सामान, खाना, स्थानीय यात्रा या छोटे-मोटे खर्च आमतौर पर टैक्स विभाग की नजर में नहीं आते। लेकिन जैसे ही कैश का इस्तेमाल बड़े लेन-देन में होता है, नियम सख्त हो जाते हैं। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया और आयकर अधिनियम के तहत यह साफ तय किया गया है कि कहां कैश की अनुमति है और कहां नहीं।
खाने-पीने, कपड़ों, ईंधन या स्थानीय सेवाओं जैसे दैनिक खर्चों के लिए कैश भुगतान पर कोई तय ऊपरी सीमा नहीं है। हालांकि, यदि बार-बार बड़ी नकद राशि आपके बैंक खाते में जमा होती है, तो बैंक इसकी रिपोर्ट कर सकते हैं।
महंगे सामान की खरीद में नियम बेहद सख्त हैं। किसी एक व्यक्ति को एक दिन में ₹2 लाख या उससे अधिक नकद भुगतान करना गैरकानूनी है। यह नियम सोना, ज्वेलरी, कार, इलेक्ट्रॉनिक्स या लग्ज़री वस्तुओं पर लागू होता है। बिल को हिस्सों में बांटकर भुगतान करना भी नियमों से बचने का तरीका नहीं माना जाता। ऐसे मामलों में UPI, कार्ड, चेक या बैंक ट्रांसफर अनिवार्य है।
प्रॉपर्टी लेन-देन में नकद पर और ज्यादा पाबंदी है। अचल संपत्ति की खरीद या बिक्री से जुड़ा ₹2 लाख या उससे अधिक का नकद भुगतान पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके अलावा ₹30 लाख या उससे अधिक मूल्य के सौदे अपने आप आयकर विभाग को रिपोर्ट हो जाते हैं।
उधार या लोन के मामलों में भी ₹20,000 या उससे अधिक की रकम नकद देना या लेना मना है। लोन की वापसी भी बैंकिंग माध्यम से ही करनी होती है। नियम तोड़ने पर उतनी ही राशि का जुर्माना लग सकता है।
संक्षेप में, छोटे रोज़मर्रा के खर्चों के लिए कैश ठीक है, लेकिन सोना, प्रॉपर्टी, वाहन या लोन जैसे बड़े लेन-देन में डिजिटल या बैंकिंग माध्यम ही सुरक्षित और कानूनी रास्ता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी वित्तीय या टैक्स संबंधी निर्णय से पहले योग्य टैक्स सलाहकार से परामर्श लें।
