राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की शताब्दी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को 100 रुपये का स्मारक सिक्का और 500 रुपये का डाक टिकट जारी किया। स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार किसी सिक्के पर ‘भारत माता’ और आरएसएस स्वयंसेवकों की तस्वीर अंकित की गई है।
सिक्के का स्वरूप
सिक्के पर भारत माता को वरद मुद्रा में दर्शाया गया है, जो कमल पर खड़ी हैं और उनके पास शेर है। उनके हाथ में आरएसएस का भगवा ध्वज है। सिक्के में तीन स्वयंसेवक भारत माता को नमन करते हुए दिखाए गए हैं। साथ ही आरएसएस का ध्येय वाक्य — “राष्ट्राय स्वाहा, इदं राष्ट्राय, इदं न मम” (“सब कुछ राष्ट्र को समर्पित है; मेरा कुछ नहीं”) लिखा है। सिक्के पर 1925–2025 अंकित है, जो आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है।
डाक टिकट का डिज़ाइन
स्मारक डाक टिकट में 1963 की गणतंत्र दिवस परेड में शामिल आरएसएस स्वयंसेवकों को दर्शाया गया है। इसमें उनके सामाजिक कार्य और अनुशासन को रेखांकित करते हुए ध्येय वाक्य “राष्ट्र भक्ति – सेवा – अनुशासन” अंकित है।
प्रधानमंत्री का वक्तव्य
कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा, “स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार भारत माता हमारे मुद्रा पर दिखाई दी हैं। यह हमारे लिए गर्व और ऐतिहासिक महत्व का क्षण है।” उन्होंने आरएसएस की राष्ट्रनिर्माण में भूमिका और आज़ादी के आंदोलन से लेकर समाजसेवा तक के योगदान की सराहना की।
विपक्ष की आलोचना
इस निर्णय पर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश और सीपीआई(एम) ने आरोप लगाया कि यह कदम आरएसएस के महिमामंडन और वैचारिक एजेंडे को बढ़ावा देने का प्रयास है। सीपीआई(एम) ने इसे “संविधान के लिए गंभीर चोट और अपमान” बताया।
यह आयोजन नागपुर से शुरू होने वाले आरएसएस के शताब्दी उत्सव के साथ मेल खाता है, जिसकी शुरुआत पारंपरिक रूप से विजयादशमी पर होती है।


