February 18, 2026
Jai Shri Ram: 51-Foot Tall Lord Ram Statue Unveiled in Canada, Becomes a New Center of Faith

Jai Shri Ram: 51-Foot Tall Lord Ram Statue Unveiled in Canada, Becomes a New Center of Faith

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अयोध्या से ओंटारियो तक — श्रद्धा, पहचान और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी भगवान राम की विशाल मूर्ति

मिसिसॉगा, कनाडा — उत्तर अमेरिका की सबसे ऊंची 51 फीट की भगवान श्रीराम की प्रतिमा का भव्य अनावरण रविवार को कनाडा के मिसिसॉगा स्थित हिंदू हेरिटेज सेंटर में किया गया। अयोध्या के राम मंदिर से प्रेरित इस मूर्ति को भारत के दिल्ली शहर में तैयार किया गया था और फिर कुशल कारीगरों द्वारा कनाडा में स्थापित किया गया।

यह प्रतिमा (बेस और छत्र को छोड़कर) अपने चारों ओर से ऊंची है और अब ग्रेटर टोरंटो एरिया में आस्था और संस्कृति की नई पहचान बन चुकी है।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और राजनैतिक उपस्थिति

अनावरण के दौरान 10,000 से अधिक श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिसने इस आयोजन को आस्था और सांस्कृतिक विरासत का भव्य उत्सव बना दिया। कार्यक्रम में कनाडा के कैबिनेट मंत्री रीची वाल्डेज़, मनिंदर सिद्धू, और शफकत अली सहित हाउस ऑफ कॉमन्स के विपक्ष के नेता भी शामिल हुए, जो इस आयोजन को मिली व्यापक राजनैतिक स्वीकृति को दर्शाता है।

तकनीकी विशेषताएं और स्थान का महत्व

फाइबरग्लास से बनी यह मूर्ति स्टील के मजबूत ढांचे पर आधारित है, जिसे 200 किमी/घंटा तक की तेज हवाओं का सामना करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसकी उम्र 100 वर्षों से अधिक बताई जा रही है। टोरंटो पीयरसन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थापित यह मूर्ति अब आने वाले यात्रियों के लिए एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्वागत का प्रतीक बन गई है।

आयोजकों की भावनाएं

हिंदू हेरिटेज सेंटर के संस्थापक आचार्य सुरिंदर शर्मा शास्त्री ने इसे “समाज के लिए एक आध्यात्मिक उपहार” बताया। प्रमुख आयोजक कुशाग्र शर्मा ने कहा,

“श्रीराम की मूर्ति के अनावरण के लिए एक साथ एकत्रित हुए 10,000 से अधिक श्रद्धालुओं को देखना बेहद गर्व का क्षण था… यह उन सभी कनाडाई नागरिकों के लिए एक प्रेरणा है जो सांस्कृतिक सौहार्द और आध्यात्मिक विरासत में विश्वास रखते हैं।”

सामाजिक मीडिया पर उत्साह

यह प्रतिमा अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन चुकी है। एक वायरल पोस्ट में लिखा गया —

अयोध्या से ओंटारियो तक, श्रीराम का नाम अब सीमाओं से भी ऊंचा गूंज रहा है।

वर्षों की मेहनत और दानदाताओं का योगदान

इस परियोजना की शुरुआत चार वर्ष पूर्व हुई थी और यह एक उदार इंडो-कनाडाई दाता के सहयोग से संभव हो पाई। यह प्रतिमा न केवल वास्तविक रूप से भव्य है, बल्कि एक सशक्त प्रतीक भी है—ऐसे मूल्यों का जो समय, समुद्र और पीढ़ियों को पार करते हैं:
संघर्ष, शांति और पहचान।

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