January 19, 2026
Thane: Five-Year-Old Girl Dies of Rabies in Diva Despite Receiving Anti-Rabies Vaccination

Thane: Five-Year-Old Girl Dies of Rabies in Diva Despite Receiving Anti-Rabies Vaccination

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ठाणे जिले के दिवा इलाके से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। पांच वर्षीय बच्ची की रेबीज से मौत हो गई, जबकि उसे एंटी-रेबीज वैक्सीन की कई खुराकें दी गई थीं। मृत बच्ची की पहचान निशा शिंदे के रूप में हुई है, जिन्होंने एक महीने तक चले इलाज के बाद 21 दिसंबर को दम तोड़ दिया।

घटना 17 नवंबर की है, जब निशा दिवा पूर्व के बेडेकर नगर स्थित दिवा–अगासन रोड इलाके में अपने घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान एक आवारा कुत्ते ने उसे कंधे पर काट लिया। बच्ची के घायल होते ही परिजन उसे तुरंत कल्याण–डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) द्वारा संचालित शास्त्री नगर अस्पताल लेकर पहुंचे।

अस्पताल रिकॉर्ड के अनुसार, 18 नवंबर की सुबह निशा को एंटी-रेबीज वैक्सीन और रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन दिया गया। इसके बाद तय कार्यक्रम के अनुसार उसे वैक्सीन की तीन और खुराकें दी गईं। शुरुआती दिनों में उसकी हालत स्थिर रही और परिजनों ने 3 दिसंबर को उसका जन्मदिन भी मनाया, यह मानते हुए कि वह खतरे से बाहर है।

हालांकि, दिसंबर के मध्य में अंतिम खुराक दिए जाने के बाद बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उसमें बेचैनी और खुद को काटने जैसे रेबीज के लक्षण दिखाई देने लगे। डॉक्टरों ने उसे मुंबई के कस्तूरबा अस्पताल रेफर किया, जहां चार दिन तक इलाज चला। तमाम कोशिशों के बावजूद 21 दिसंबर को उसकी मौत हो गई।

बच्ची के मामा समाधान कदम ने आरोप लगाया कि समय पर और सही इलाज में हुई चूक के कारण उसकी जान गई। परिवार ने चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

इस मामले पर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने भी प्रतिक्रिया दी है। शिवसेना (यूबीटी) के कल्याण ग्रामीण विधानसभा प्रमुख और अधिवक्ता रोहिदास मुंडे ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि दिवा में आवारा कुत्तों की समस्या बढ़ती जा रही है और डॉग बाइट की घटनाएं आम हो गई हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों में भय का माहौल है। उन्होंने आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की।

चिकित्सकीय पहलू पर प्रकाश डालते हुए पशु चिकित्सा सूक्ष्मजीव विज्ञानी और कॉलेज ऑफ वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज के प्रोफेसर डॉ. अशोक भोसले ने बताया कि एक बार रेबीज के लक्षण दिखने लगें तो यह लगभग हमेशा जानलेवा साबित होता है। उन्होंने कहा कि संक्रमण का असर इस बात पर निर्भर करता है कि कुत्ता रेबीज से संक्रमित था या नहीं और काटने की जगह कहां थी, क्योंकि दिमाग के करीब काटे जाने पर वायरस तेजी से फैलता है। उन्होंने जोर दिया कि वैक्सीन के साथ-साथ रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन तुरंत दिया जाना बेहद जरूरी है।

वहीं, KDMC की स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दीपा शुक्ला ने कहा कि अस्पताल रिकॉर्ड के अनुसार बच्ची को एंटी-रेबीज वैक्सीन और इम्युनोग्लोबुलिन दोनों दिए गए थे और आगे की सभी खुराकें भी निर्धारित समय पर दी गईं। उन्होंने बताया कि कस्तूरबा अस्पताल से विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है ताकि यह समझा जा सके कि सभी प्रोटोकॉल का पालन होने के बावजूद संक्रमण कैसे बढ़ा।

ठाणे महानगरपालिका के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रसाद पाटिल ने कहा कि सभी मेडिकल रिकॉर्ड और टीकाकरण से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है और पूरी समीक्षा के बाद ही इस मामले पर आधिकारिक टिप्पणी की जाएगी।

इस घटना ने एक बार फिर रेबीज को लेकर जागरूकता, कुत्ते के काटने के बाद इलाज की समयसीमा और आवारा पशुओं पर सख्त नियंत्रण की जरूरत पर बहस छेड़ दी है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।

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