Kodinhi – India’s Unique ‘Twin Village’ Where No One Knows Why
भारत विविधताओं से भरा देश है — यहां की संस्कृति, परंपराएं, लोग और प्राकृतिक धरोहरें दुनिया को चकित करती हैं। इस विशाल देश में कुछ ऐसे स्थान भी हैं जो अपनी खासियत के लिए अद्वितीय हैं — कहीं पारंपरिक कला से सजे गांव, कहीं दुर्लभ औषधीय पौधों से भरपूर स्थल, तो कहीं पौराणिक महत्व वाले धार्मिक स्मारक।
लेकिन क्या आप जानते हैं, भारत में एक ऐसा गांव भी है जिसे ‘जुड़वाँ गांव’ के नाम से जाना जाता है — और यह नाम बिल्कुल सही साबित होता है।
अद्भुत संयोग वाला गांव
केरल के मलप्पुरम ज़िले में स्थित कोडिन्ही गांव में लगभग 2,000 परिवार रहते हैं, और आश्चर्यजनक रूप से यहां 550 से अधिक जुड़वाँ जोड़े हैं।
अक्सर इसे ‘ट्विन टाउन’ (Twin Town) कहा जाता है। यह संख्या न केवल भारत के औसत जुड़वाँ जन्म दर से कहीं अधिक है, बल्कि यह सिलसिला हर साल जारी है। नए-नए जुड़वाँ बच्चे जन्म लेते रहते हैं, जिससे कोडिन्ही भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के लिए एक रहस्य बन गया है।
स्थानीय मान्यताएं – ईश्वर का आशीर्वाद
गांव के लोगों के अनुसार, जुड़वाँ जन्म होना किसी स्थानीय देवी का आशीर्वाद है। कुछ लोग मानते हैं कि यहां का पानी विशेष गुणों वाला है, जो प्रजनन क्षमता को बढ़ाता है।
गांव के निवासी मिराज बताते हैं –
“जुड़वाँ होना हमारे लिए ईश्वर का दिया हुआ तोहफ़ा है। यह मान्यता पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और यही कोडिन्ही को खास बनाती है।”
वैज्ञानिकों की खोज
इस रहस्य को समझने के लिए वैज्ञानिक भी कोडिन्ही पहुंचे। अक्टूबर 2016 में CSIR–सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, केरल यूनिवर्सिटी ऑफ फिशरीज एंड ओशन स्टडीज़ (KUFOS) और लंदन व जर्मनी के शोधकर्ताओं की एक टीम ने गांव का दौरा किया।
उन्होंने जुड़वाँ बच्चों के डीएनए की जांच के लिए बाल और लार के नमूने लिए। KUFOS के प्रोफेसर ई. प्रीतम के अनुसार –
“कुछ लोग मानते हैं कि यह आनुवंशिक कारणों से है, लेकिन यह भी संभावना है कि गांव की हवा या पानी में मौजूद कोई विशेष तत्व इसका कारण हो।”
दिलचस्प बात यह है कि यहां कई जुड़वाँ जन्म ऐसे परिवारों में भी होते हैं जिनमें पहले कभी जुड़वाँ बच्चों का इतिहास नहीं रहा।
दुनिया में और भी हैं जुड़वाँ गांव
कोडिन्ही अकेला ऐसा गांव नहीं है। ब्राज़ील के कैंडिडो गोडोई और नाइजीरिया के इग्बो-ओरा में भी जुड़वाँ बच्चों की संख्या असामान्य रूप से अधिक है। वैज्ञानिकों का मानना है कि स्थानीय खानपान या पौधों में मौजूद कुछ रासायनिक तत्व इसका कारण हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, इग्बो-ओरा में शोधकर्ताओं को संदेह है कि स्थानीय कंद वाली सब्जी के छिलके में मौजूद एक रसायन जुड़वाँ जन्म को बढ़ावा देता है।
जुड़वाँ महोत्सव और ‘ट्विन्स एंड किन्स’ संघ
कोडिन्ही में जुड़वाँ बच्चों का होना सिर्फ एक रहस्य नहीं, बल्कि गर्व का विषय है। हर साल यहां जुड़वाँ महोत्सव (Twin Festival) आयोजित होता है, जिसमें जुड़वाँ भाई-बहन और उनके परिवार एक साथ आते हैं, अपनी कहानियां साझा करते हैं और अपनी खास पहचान का जश्न मनाते हैं।
यह त्योहार न केवल गांव में एकता बढ़ाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि जुड़वाँ होना यहां के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने का अहम हिस्सा है।
2008 में करीब 30 जुड़वाँ जोड़ों और उनके परिवारों ने ‘ट्विन्स एंड किन्स एसोसिएशन’ का गठन किया। यह संगठन विशेष रूप से शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर काम करता है और गांव के जुड़वाँ बच्चों की ज़रूरतों और समस्याओं को सामने लाने का माध्यम बन गया है।
