January 19, 2026
Why Marigolds Bloom Every October: Secrets From Grandmothers’ Gardens

Why Marigolds Bloom Every October: Secrets From Grandmothers’ Gardens

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आजकल हम में से कई लोग अपार्टमेंट्स में रहते हैं, जहाँ आंगन की जगह बालकनी ने ले ली है। फिर भी, नारंगी रंग के गेंदा से भरे गमले को देखकर एक अजीब सुकून मिलता है।

भारत में घर के आँगन या बगीचे में गेंदा (Marigold) लगाना एक परंपरा जैसा रहा है। खासकर दादी-नानी की पीढ़ी अक्टूबर महीने में गेंदा लगाना कभी नहीं भूलती थी। यह केवल बागवानी की आदत नहीं थी, बल्कि इसके पीछे धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक कारण भी छिपे हुए हैं।

अक्टूबर में गेंदा लगाना सिर्फ बागवानी नहीं है — यह परंपरा को जीवित रखना है। यह याद करना है कि हमारी दादी-नानी मौसम को कैसे समझती थीं, आसमान, मिट्टी और त्योहारों को देखकर, ऐप्स पर भरोसा किए बिना।

गेंदा अब लगाना उनकी समझ का हिस्सा अपनाना है: बाग को रंगीन बनाना, अन्य पौधों की प्राकृतिक सुरक्षा करना, और उस फूल का स्वागत करना जो सदियों से भारतीय घरों का हिस्सा रहा है। जब अक्टूबर आता है, मिट्टी में कुछ गेंदा के बीज दबाना शायद आपको याद दिला दे कि आपकी दादी हमेशा यही क्यों करती थीं।

त्योहारों का फूल

अगर आप किसी भारतीय दादी से पूछें कि उन्होंने अक्टूबर में गेंदा क्यों लगाया, तो उनका जवाब शायद कभी बॉटनिकल नहीं होगा। “दीवाली आ रही है,” वे कह सकती हैं, या “दुर्गा पूजा के लिए ताजे फूल चाहिए।”

चमकीले, रंगीन और सुगंधित, गेंदा मालाओं, मंदिर की भेंटियों और दरवाजे की सजावट के लिए अनिवार्य था। इसके रंग ऊर्जा, सकारात्मकता और सुरक्षा का प्रतीक होते थे — प्रकाश और उत्सव के मौसम के लिए बिल्कुल उपयुक्त।

आइए जानते हैं क्यों अक्टूबर गेंदा लगाने का सबसे उपयुक्त समय माना जाता है और इसके क्या फायदे हैं।

1. धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

गेंदा का फूल हिंदू संस्कृति में बेहद पवित्र माना जाता है। दीपावली, नवरात्रि, और छठ पूजा जैसे प्रमुख त्योहार अक्टूबर-नवंबर में आते हैं। इन अवसरों पर गेंदा की मालाओं और सजावट का खास महत्व होता है। दादी-नानी इसलिए अक्टूबर में गेंदा लगाती थीं ताकि त्योहारों तक पौधे पर भरपूर फूल आ जाएँ और घर-आँगन में सजावट के लिए ताजे फूल मिल सकें।

2. मौसम के अनुकूल समय

अक्टूबर का महीना गेंदा लगाने के लिए सबसे अनुकूल होता है। इस समय बारिश का मौसम खत्म हो चुका होता है और ठंडी हवाएँ धीरे-धीरे शुरू होती हैं। ऐसे में पौधों को नमी भी मिलती है और उन्हें तेज धूप या भारी बारिश से नुकसान भी नहीं होता। इस वजह से गेंदा तेजी से बढ़ता है और दिसंबर-जनवरी तक खूब फूल देता है।

3. आसान देखभाल वाला पौधा

गेंदा का पौधा ज्यादा देखभाल नहीं मांगता। यह सूखी मिट्टी में भी आसानी से उग जाता है। दादी-नानी मानती थीं कि यह पौधा ‘कम खर्चे वाला खुशियों का पौधा’ है। घर के आँगन या गमले में भी यह आसानी से लग जाता है और लंबे समय तक फूल देता है।

4. घर की शोभा और माहौल

गेंदा न सिर्फ पूजा में काम आता है बल्कि इसकी खुशबू और रंग घर के वातावरण को सकारात्मक बनाते हैं। पीले और नारंगी रंग के फूल ऊर्जा और उत्साह का प्रतीक माने जाते हैं। इसलिए घर की सुंदरता बढ़ाने के लिए दादी हमेशा गेंदा लगाती थीं।

5. कीट और मच्छरों से बचाव

गेंदा के पौधे की खुशबू और इसके अंदर मौजूद कुछ प्राकृतिक तत्व कीटों और मच्छरों को दूर रखते हैं। पुराने समय में जब केमिकल वाले रिपेलेंट उपलब्ध नहीं थे, तब लोग प्राकृतिक उपायों पर भरोसा करते थे। गेंदा लगाना उनमें से एक था।

गेंदा कैसे उगाएँ

अपनी दादी-नानी की प्यारी परंपरा को जीवित रखें! गेंदा रंग-बिरंगा और खुशियों भरा फूल है, जिसे उगाना बहुत आसान है। यहाँ इसे उगाने का सरल तरीका दिया गया है:

1. सही जगह चुनें:
ऐसा स्थान चुनें जहाँ सूरज की रोशनी अच्छी मिले, क्योंकि गेंदा धूप में सबसे अच्छी तरह बढ़ता है।

2. मिट्टी की तैयारी:
अच्छी जल निकासी वाली, मध्यम उर्वरक वाली मिट्टी का उपयोग करें। गेंदा ज्यादा मांग वाला पौधा नहीं है, लेकिन अच्छी मिट्टी में यह तेजी से बढ़ता है।

3. बीज बोना:
बीज सीधे मिट्टी में बो सकते हैं या पहले गमलों में उगा सकते हैं। बीज को हल्के से मिट्टी से ढक दें।

4. पानी देना:
मिट्टी को नियमित रूप से नम रखें, लेकिन पानी भरने से बचें। पानी देने के बीच मिट्टी को थोड़ा सूखने दें।

5. देखभाल:
सूखे और मुरझाए हुए फूलों को हटाते रहें। इससे नए फूल खिलते हैं और पौधा हमेशा ताजा दिखाई देता है।

निष्कर्ष

गेंदा लगाना केवल परंपरा या सजावट का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह प्रकृति और संस्कृति से जुड़ी हुई एक समझदारी भरी आदत थी। अक्टूबर में लगाए गए गेंदा के पौधे न केवल त्योहारों में घर को सजाते थे, बल्कि स्वास्थ्य, पर्यावरण और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत भी बनते थे। यही कारण है कि आपकी दादी हमेशा अक्टूबर में गेंदा लगाना जरूरी समझती थीं।

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