New Year 2026: Begin the Year with Calm, Culture and Spiritual Travel in India
पंजाब की बात हो और अमृतसर का जिक्र न आए, यह मुमकिन नहीं। अमृतसर न केवल पंजाब का सबसे बड़ा शहर है, बल्कि यह धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी बेहद खास माना जाता है। यहां हर रोज लाखों श्रद्धालु स्वर्ण मंदिर में मत्था टेकने पहुंचते हैं और लंगर का प्रसाद ग्रहण करते हैं।
अमृतसर, जिसे ‘गोल्डन सिटी’ (Golden City) के नाम से जाना जाता है, पंजाब का दूसरा सबसे बड़ा शहर है और इसकी पहचान सिर्फ इसके आकार से नहीं, बल्कि इसकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से होती है। 15वीं सदी में सिखों के चौथे गुरु, गुरु रामदास जी द्वारा स्थापित यह शहर समय के साथ श्रद्धा, सेवा और संगठित संस्कृति का प्रतीक बन गया है।
यहां स्थित स्वर्ण मंदिर (Golden Temple) न केवल सिख धर्म का सबसे पवित्र स्थल है, बल्कि पूरी दुनिया के लोगों को शांति, समरसता और मानवता का संदेश भी देता है। अमृत सरोवर के चारों ओर बसा यह शहर सचमुच ‘अमृत’ की अनुभूति कराता है।
हर दिन यहां लाखों लोग लंगर में प्रसाद पाते हैं — बिना किसी भेदभाव के, जो अमृतसर की सेवा परंपरा का जीवंत उदाहरण है।
यहां की पुरानी गलियां, रंगीन बाजार, पारंपरिक पंजाबी संस्कृति, और लजीज़ खाने की खुशबू इस शहर को एक अनोखी पहचान देती है। अमृतसरी नान, मक्के दी रोटी और सरसों दा साग का स्वाद मुंह में पानी ला देता है, और यहां की ठंडी लस्सी दिल को ताजगी से भर देती है।
जलियांवाला बाग जैसे ऐतिहासिक स्थल इस शहर को इतिहास में अमर बनाते हैं, तो वहीं वाघा बॉर्डर पर हर शाम होने वाली परेड देशभक्ति का अद्भुत अनुभव कराती है।
कुल मिलाकर, अमृतसर सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक अनुभव है — जिसमें भक्ति भी है, विरासत भी, और स्वाद भी।

स्वर्ण मंदिर: आस्था और सेवा का प्रतीक
अमृतसर की पहचान हरमंदिर साहिब, यानी कि स्वर्ण मंदिर से है। इसकी छत और दीवारें असली सोने से जड़ी हुई हैं, जो सूरज की रोशनी में अद्भुत चमक बिखेरती हैं। यही कारण है कि अमृतसर को ‘गोल्डन सिटी’ यानी ‘स्वर्ण नगरी’ कहा जाता है। यहां रोज़ाना करीब एक से डेढ़ लाख लोग लंगर में प्रसाद ग्रहण करते हैं।
गुरु रामदास जी ने रखी थी शहर की नींव
अमृतसर की स्थापना 15वीं सदी में सिखों के चौथे गुरु, गुरु रामदास जी ने की थी। शहर का नाम पंजाबी शब्द ‘अमृत सरोवर’ से बना है, जिसका अर्थ है ‘अमृत से भरा तालाब’। यही सरोवर स्वर्ण मंदिर के चारों ओर स्थित है, जो शहर की आध्यात्मिक आभा को और भी बढ़ा देता है।
इतिहास और संस्कृति की अनूठी झलक
अमृतसर सिर्फ एक धार्मिक नगरी नहीं, बल्कि सिख संस्कृति और भारतीय इतिहास की अनेक कहानियों को समेटे हुए है। शहर की गलियों में चलते हुए आपको पारंपरिक हस्तशिल्प, लोकनाट्य, पुराने बाजार और पंजाबी विरासत की जीवंत तस्वीरें देखने को मिलती हैं। बैसाखी, दीपावली जैसे त्योहार इस शहर को और भी रंगीन बना देते हैं।
स्वाद का शहर: अमृतसर का लाजवाब खानपान
अमृतसर अपने स्वादिष्ट पंजाबी व्यंजनों के लिए भी दुनियाभर में मशहूर है। अमृतसरी कुलचे, छोले-भटूरे, मक्के दी रोटी-सरसों दा साग, और ठंडी लस्सी यहां आने वालों की पहली पसंद होती हैं। यहां का हर जायका अमृतसर की गर्मजोशी और अपनापन महसूस कराता है।
अमृतसर: एक बार जरूर घूमिए
धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और स्वादिष्ट खानपान से भरपूर अमृतसर हर किसी के दिल में अपनी खास जगह बना लेता है। यही वजह है कि इसे ‘गोल्डन सिटी’ कहा जाता है — एक ऐसा शहर जो न केवल सोने की तरह चमकता है, बल्कि दिलों को भी रोशन कर देता है।
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