The Secret to Fitness at 75: Simple Diet, Fasting, and Ayurveda
बढ़ती उम्र में शरीर की ऊर्जा कम होना और बीमारियों का खतरा बढ़ना स्वाभाविक माना जाता है। लेकिन सही जीवनशैली, संतुलित आहार और अनुशासन से यह धारणा बदल सकती है। 75 वर्ष की आयु में भी यदि कोई व्यक्ति चुस्त-दुरुस्त और सक्रिय है तो इसका रहस्य केवल महंगे सप्लीमेंट्स या आधुनिक तकनीकों में नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, आयुर्वेद और साधारण जीवनशैली में छिपा है।
उपवास: शरीर और मन का संतुलन
उपवास भारतीय संस्कृति और आयुर्वेद का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। नियमित उपवास करने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है, शरीर की डिटॉक्स प्रक्रिया सक्रिय होती है और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है। चतुर्मास जैसे अवसरों पर दिन में केवल एक बार भोजन करना न सिर्फ शरीर की ऊर्जा को संतुलित करता है, बल्कि आत्मिक शांति और नियंत्रण भी प्रदान करता है। कई लोग धार्मिक उपवास के दौरान केवल गर्म पानी का सेवन करते हैं, जो शरीर को शुद्ध करने और अनावश्यक टॉक्सिन्स को बाहर निकालने का प्रभावी तरीका है।

गर्म पानी की आदत
उन्होंने यह भी बताया कि शारदीय नवरात्रि के दौरान वे “पूरी तरह” भोजन से परहेज़ करते हैं और केवल गर्म पानी पीते हैं। उन्होंने कहा, “हालांकि गर्म पानी पीना हमेशा मेरी दिनचर्या का हिस्सा रहा है, मेरा पिछला जीवनशैली ऐसा था कि यह आदत समय के साथ स्वाभाविक रूप से विकसित हो गई।”
पोषण और परंपरा से जुड़ा भोजन

- मोरिंगा पराठा: मोरिंगा में प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने और पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।
- नीम की पत्तियाँ और नीम के फूल: आयुर्वेदिक दृष्टि से इम्यूनिटी बढ़ाने और शरीर को शुद्ध करने के लिए बेहद लाभकारी।
- मिश्री (खड़ी शक्कर): प्राकृतिक मिठास का स्रोत, जो पाचन के साथ-साथ शरीर को ठंडक भी प्रदान करती है।
रोज़मर्रा का हल्का और पौष्टिक भोजन
साधारण भोजन ही वास्तव में स्वास्थ्य का आधार है। जैसे –

- खिचड़ी: दाल, चावल, हल्दी और घी से बनी खिचड़ी शरीर को जरूरी प्रोटीन और ऊर्जा प्रदान करती है और पचने में बेहद आसान होती है।
- ढोकला: बेसन और सूजी से तैयार ढोकला हल्का, पौष्टिक और स्वादिष्ट विकल्प है, जो भारी तैलीय भोजन से बचाव करता है।
जीवनशैली का मूल मंत्र
सिर्फ भोजन ही नहीं, बल्कि जीवनशैली के छोटे-छोटे अनुशासन भी फिटनेस बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
- भोजन हमेशा घर का बना और प्राकृतिक होना चाहिए।
- तैलीय, मसालेदार और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से दूरी रखनी चाहिए।
- मौसमी बदलावों और धार्मिक अवसरों के अनुसार डाइट में परिवर्तन शरीर को प्राकृतिक लय से जोड़े रखता है।
- पर्याप्त मात्रा में गर्म पानी का सेवन पाचन तंत्र को सक्रिय रखता है और शरीर को शुद्ध करता है।
निष्कर्ष
75 वर्ष की आयु में भी ऊर्जा, स्फूर्ति और मानसिक संतुलन बनाए रखना किसी चमत्कार जैसा लग सकता है, लेकिन यह संभव है। इसका रहस्य है – अनुशासित जीवन, साधारण भोजन, उपवास और परंपरागत आयुर्वेदिक आदतें। यही संयोजन हमें सिखाता है कि स्वास्थ्य का असली आधार सरलता और संतुलन है।
