महाराष्ट्र में शुक्रवार को कैब और ऑटो-रिक्शा चालकों द्वारा बुलाए गए एक दिवसीय राज्यव्यापी बंद को जबरदस्त समर्थन मिला। बंद के चलते यात्री परिवहन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं और बाइक टैक्सी सेवाओं के विरोध का मुद्दा मजबूती से सामने आया।
मुंबई, पुणे, ठाणे, नवी मुंबई, नागपुर, नाशिक, औरंगाबाद, कोल्हापुर, सातारा, सोलापुर समेत कई शहरी और ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में चालक हड़ताल में शामिल रहे। रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 70 से 80 प्रतिशत कैब और ऑटो-रिक्शा सड़कों से नदारद रहे, जिससे आम यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
हड़ताल के कारण ऐप-आधारित कैब सेवाओं में अधिकांश इलाकों में ‘रेड ज़ोन’ दिखाई दिए, जो वाहनों की भारी कमी को दर्शाता है। सीमित संख्या में उपलब्ध कैब्स ने कई जगहों पर सामान्य से तीन से चार गुना तक किराया वसूला, जिससे यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा।
चालक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि किरायों में भारी बढ़ोतरी से यह साफ हो गया है कि ऐप-आधारित कंपनियां चालकों के बिना काम नहीं कर सकतीं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी परिस्थितियों में यात्रियों को अनुचित और शोषणकारी किराए चुकाने पड़ते हैं, जिसे इस हड़ताल ने उजागर कर दिया।
चालकों ने ओला, उबर और रैपिडो जैसी कंपनियों पर परिवहन विभाग के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया। यूनियनों का कहना है कि ये प्लेटफॉर्म किराया संरचना, कमीशन सीमा, लाइसेंस, बीमा, यात्री सुरक्षा और कानूनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं कर रहे हैं। उनका आरोप है कि जहां चालकों की आय घट रही है और उन पर ज्यादा कमीशन का बोझ है, वहीं यात्रियों से मनमाना किराया वसूला जा रहा है।
हड़ताल का एक प्रमुख मुद्दा बाइक टैक्सी सेवाओं का विरोध भी रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्पष्ट कानूनी ढांचे, उचित लाइसेंसिंग, सुरक्षा मानकों और बीमा व्यवस्था के बिना बाइक टैक्सियों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो सड़क सुरक्षा के लिए खतरा है और पारंपरिक कैब-ऑटो चालकों की रोज़ी-रोटी पर सीधा असर डालता है। यूनियनों ने मांग की कि सख्त और स्पष्ट नीति लागू होने तक बाइक टैक्सी सेवाओं की अनुमति न दी जाए।
चालक संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सरकार ने ठोस और तत्काल कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में और भी व्यापक तथा तीव्र आंदोलन किया जाएगा।


