How to Book Cheap Flights and Save Thousands on Airfare
हवाई यात्रा अब जरूरी नहीं कि महंगी हो। अगर यात्री एयरलाइंस की कीमत तय करने की प्रक्रिया को समझें और टिकट बुक करते समय सही रणनीति अपनाएं, तो वे हवाई किराए पर हजारों रुपये बचा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फ्लाइट की कीमतें मांग, समय और सर्च पैटर्न के आधार पर लगातार बदलती रहती हैं, इसलिए सस्ते टिकट पाना किस्मत से ज्यादा समझदारी पर निर्भर करता है।
सबसे अहम बात है सही समय पर टिकट बुक करना। घरेलू उड़ानों के लिए यात्रा की तारीख से एक से तीन महीने पहले टिकट लेना सबसे बेहतर माना जाता है। बहुत पहले बुकिंग करने पर भी किराया ज्यादा हो सकता है, जबकि आखिरी समय में टिकट लगभग हमेशा महंगा होता है। वहीं अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए तीन से छह महीने पहले बुकिंग करना आमतौर पर सबसे किफायती रहता है।
यात्रा की तारीखों में लचीलापन रखने से भी बड़ा फर्क पड़ता है। सप्ताहांत की तुलना में मंगलवार और बुधवार को उड़ानें अक्सर सस्ती होती हैं। कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अब “सबसे सस्ता महीना” या कैलेंडर व्यू जैसी सुविधाएं देते हैं, जिससे अलग-अलग तारीखों के किराए की तुलना आसान हो जाती है। कभी-कभी सिर्फ एक दिन आगे-पीछे करने से टिकट काफी सस्ता मिल सकता है।
बजट एयरलाइंस भी सस्ते टिकट का अच्छा विकल्प हैं, खासकर छोटी दूरी की यात्राओं के लिए। इंडिगो, स्पाइसजेट जैसी लो-कॉस्ट एयरलाइंस कम बेस फेयर देती हैं, लेकिन खाने, सीट चयन और चेक-इन बैगेज के लिए अलग शुल्क लेती हैं। हल्का सामान लेकर यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए ये एयरलाइंस किफायती साबित होती हैं, हालांकि अंतिम कीमत जरूर जांचनी चाहिए।
सीधी उड़ान की बजाय कनेक्टिंग फ्लाइट चुनना भी पैसे बचाने का एक तरीका है। एक स्टॉप वाली फ्लाइट्स अक्सर सस्ती होती हैं, खासकर अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर। जिन यात्रियों को समय की ज्यादा जल्दी नहीं होती, उनके लिए यह अच्छा विकल्प हो सकता है।
फेयर कंपेरिजन वेबसाइट्स जैसे गूगल फ्लाइट्स, स्काईस्कैनर, कायक और मोमोंडो सस्ते टिकट ढूंढने में काफी मददगार हैं। ये प्लेटफॉर्म कई एयरलाइंस और बुकिंग साइट्स के दाम दिखाते हैं और कीमत घटने पर अलर्ट भी भेजते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अंतिम बुकिंग से पहले एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी कीमत जरूर जांच लें।
कुकीज क्लियर करने या इनकॉग्निटो मोड में सर्च करने को लेकर भी चर्चा रहती है। हालांकि एयरलाइंस इसका असर मानने से इनकार करती हैं, फिर भी कई यात्री प्राइवेट ब्राउज़िंग में सर्च करना पसंद करते हैं, क्योंकि इसमें कोई नुकसान नहीं है।
मौसम भी टिकट की कीमतों को प्रभावित करता है। पीक सीजन में किराया ज्यादा होता है, जबकि शोल्डर सीजन यानी पीक से ठीक पहले या बाद में यात्रा करने पर कम भीड़ और सस्ते टिकट दोनों मिल सकते हैं।
कुल मिलाकर, सस्ती फ्लाइट बुकिंग सही समय, लचीलापन और जागरूकता का खेल है। जो यात्री पहले से योजना बनाते हैं, कीमतों पर नजर रखते हैं और वैकल्पिक तारीखों व रूट्स के लिए खुले रहते हैं, वे बिना सुविधा से समझौता किए हवाई किराए में बड़ी बचत कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर: फ्लाइट के किराए मांग और एयरलाइन नीतियों के अनुसार अक्सर बदलते रहते हैं। यहां बताए गए दाम और सुझाव केवल संकेतात्मक हैं और रूट, मौसम व उपलब्धता के आधार पर अलग हो सकते हैं।
