From Village Walls to Royal Courts: The Rich Legacy of Indian Paintings
भारत की चित्रकला परंपरा लगभग ३०,००० वर्ष पुरानी है। भीमबेटका की गुफ़ाओं से लेकर अजन्ता–एलोरा की भित्तिचित्रकला और फिर राजस्थानी–मुगल लघुचित्र तक, हर काल और हर क्षेत्र ने अपनी अलग पहचान बनाई।
इसे तीन बड़े कालखंडों में बाँटा जा सकता है –
- प्राचीन काल की चित्रकला (गुफ़ा, भित्ति, अजंता)
- मध्यकालीन शास्त्रीय और दरबारी चित्रकला (मुग़ल, राजस्थानी, पहाड़ी, दक्कनी)
- लोक एवं जनजातीय चित्रकला (मधुबनी, वारली, गोंड, पट्टचित्र आदि)
अब हर प्रमुख शैली को विस्तार से देखें –
१. गुफ़ा और भित्ति चित्र (Cave & Mural Paintings)

- काल: पाषाण युग से गुप्तकाल तक
- स्थान: भीमबेटका (मध्यप्रदेश), अजंता–एलोरा (महाराष्ट्र), बाघ गुफाएँ (धार), सिट्टानवसल (तमिलनाडु)।
- विशेषताएँ:
- प्राकृतिक रंग (लाल गेरुआ, कोयला, पत्तियों का रस)।
- विषय – शिकार दृश्य, नृत्य, पशु-पक्षी, धार्मिक कथाएँ।
- महत्व: ये चित्र भारतीय मानव सभ्यता के सबसे पुराने प्रमाण हैं।
२. मुग़ल चित्रकला (Mughal Paintings)

- उत्पत्ति: अकबर (१६वीं सदी) के समय, फारसी कलाकारों और भारतीय कारीगरों के सहयोग से।
- विशेषताएँ:
- बारीक कूची (fine brush work)।
- प्राकृतिक दृश्य, दरबारी जीवन, युद्ध दृश्य।
- फ़ारसी रंग और यूरोपीय परिप्रेक्ष्य का प्रभाव।
- प्रसिद्ध ग्रंथ: हमज़ानामा, अकबरनामा, जहांगीर्नामा।
- महत्व: यह “भारत–फ़ारस–यूरोप” कला का संगम है।
३. राजस्थानी चित्रकला (Rajasthani Miniature Paintings)

- क्षेत्र: मेवाड़, मारवाड़, बूंदी, किशनगढ़, जयपुर।
- विशेषताएँ:
- चमकीले रंग (लाल, पीला, नीला)।
- धार्मिक कथाएँ – राधा–कृष्ण, रामायण, महाभारत।
- छोटे आकार के लघुचित्र, सजावटी बॉर्डर।
- प्रसिद्ध विद्यालय:
- किशनगढ़: राधा–कृष्ण श्रृंगार।
- बूंदी: बारिश और जंगल दृश्य।
- महत्व: यह शुद्ध भारतीय शैली मानी जाती है, मुग़ल प्रभाव से अलग।
४. पहाड़ी चित्रकला (Pahari Paintings)

- क्षेत्र: हिमाचल, गढ़वाल, कांगड़ा, बसोहली।
- विशेषताएँ:
- हल्के रंग, कोमलता।
- भक्ति और प्रेम – खासकर रासलीला और गीता गोविंद।
- प्रकृति का अद्भुत चित्रण।
- कांगड़ा शैली: सबसे प्रसिद्ध, जिसमें श्रृंगार रस प्रधान है।
- महत्व: भारतीय कला का सबसे रोमांटिक और कोमल रूप।
५. दक्कनी चित्रकला (Deccan Paintings)

- क्षेत्र: अहमदनगर, बीजापुर, गोलकुंडा, हैदराबाद।
- विशेषताएँ:
- फ़ारसी और दक्षिण भारतीय मिश्रण।
- गहरे रंग, गोल चेहरे, भारी आभूषण।
- दरबार और दरबारी स्त्रियों पर केंद्रित।
- महत्व: यह दक्कन सल्तनतों की विलासिता और संस्कृति का दर्पण है।
६. तंजावुर चित्रकला (Tanjore Paintings)

- क्षेत्र: तमिलनाडु (१७वीं सदी से)।
- विशेषताएँ:
- सोने की परत और रत्नों का प्रयोग।
- देवी–देवताओं के मंदिर-चित्र।
- चेहरों पर गोलाई और चमक।
- महत्व: दक्षिण भारत की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक कला।
७. पट्टचित्र (Pattachitra)

- क्षेत्र: ओडिशा और बंगाल।
- विशेषताएँ:
- कपड़े (पट्ट) या पत्तों पर चित्र।
- विषय – भगवान जगन्नाथ, दशावतार, रामायण।
- बॉर्डर पर सुंदर अलंकरण।
- महत्व: ओडिशा की लोक और धार्मिक धरोहर।
८. मधुबनी चित्रकला (Madhubani Painting)

- क्षेत्र: मिथिला (बिहार)।
- विशेषताएँ:
- ज्यामितीय पैटर्न, भरपूर रंग।
- शादी और त्योहार में बनाई जाती है।
- राधा–कृष्ण, सूर्य–चंद्रमा।
- महत्व: विश्वभर में प्रसिद्ध भारतीय लोककला।
९. वारली चित्रकला (Warli Painting)

- क्षेत्र: महाराष्ट्र के आदिवासी।
- विशेषताएँ:
- मिट्टी की दीवार पर सफेद रंग (चावल का पेस्ट)।
- साधारण आकृतियाँ – त्रिकोण, वृत्त।
- खेती, विवाह, नृत्य।
- महत्व: सबसे पुरानी जनजातीय शैली (२५०० ईसा पूर्व तक के प्रमाण)।
१०. गोंड चित्रकला (Gond Painting)

- क्षेत्र: मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़।
- विशेषताएँ:
- डॉट्स और लाइनों से आकृतियाँ।
- जानवर, जंगल, देवी-देवता।
- चमकीले रंग।
- महत्व: गोंड जनजाति की मिथकीय कहानियाँ।
११. कलमकारी चित्रकला (Kalamkari Painting)

- क्षेत्र: आंध्र प्रदेश, तेलंगाना।
- विशेषताएँ:
- कपड़े पर कलम और प्राकृतिक रंग।
- रामायण, महाभारत कथाएँ।
- दो प्रकार – श्रिकालहस्ती (हाथ से), मछलीपट्टनम (ब्लॉक प्रिंट)।
- महत्व: धार्मिक और वस्त्र कला दोनों।
१२. फड़ चित्रकला (Phad Painting)

- क्षेत्र: राजस्थान।
- विशेषताएँ:
- कपड़े पर लंबा पट (फड़)।
- पाबूजी, देवनारायण जैसे लोकदेवता की कथाएँ।
- इसे भोपे (गायक) मंदिर जैसे उपयोग करते हैं।
- महत्व: चलती-फिरती “धार्मिक चित्रकथा”।
१३. चित्तरा चित्रकला (Chittara Painting)

- क्षेत्र: कर्नाटक।
- विशेषताएँ:
- लाल मिट्टी की दीवार पर सफेद पेंट।
- ज्यामितीय आकृतियाँ।
- त्यौहार, शादी, धार्मिक अवसर।
१४. अन्य शैलियाँ
- मुगल-राजपूत मिश्रित शैली
- बटिक पेंटिंग (मोम तकनीक – पश्चिम बंगाल, गुजरात)
- फ्रैस्को (भित्ति चित्र) – अजंता/एलोरा
- गोवा की क्रिश्चियन कला – चर्च पेंटिंग्स
निष्कर्ष
भारतीय चित्रकला “एकता में विविधता” का श्रेष्ठ उदाहरण है।
- अजंता–एलोरा ने आध्यात्मिक और बौद्ध परंपरा दिखाई।
- मुग़ल–राजस्थानी ने राजसी भव्यता और प्रेम चित्रित किया।
- लोककला (मधुबनी, वारली, गोंड) ने आम जनजीवन और प्रकृति का चित्रण किया।
आज भी ये कलाएँ जीवित हैं – कई UNESCO द्वारा मान्यता प्राप्त हैं और भारत की सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ा रही हैं।
