February 26, 2026
First Lunar Eclipse of 2026 on March 3 to Coincide with Holika Dahan; Sutak to Begin in Morning

First Lunar Eclipse of 2026 on March 3 to Coincide with Holika Dahan; Sutak to Begin in Morning

Share This News


साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगेगा और खास बात यह है कि इसी दिन होलिका दहन भी मनाया जाएगा। यह खगोलीय घटना पूरे भारत में दिखाई देगी, जिससे यह धार्मिक आस्था रखने वालों और खगोल प्रेमियों दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

द्रिक पंचांग के अनुसार, चंद्र ग्रहण सिंह राशि में होगा। ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:47 बजे (भारतीय समयानुसार) तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार सूतक काल सुबह 9:39 बजे से शुरू होकर शाम 6:46 बजे तक प्रभावी रहेगा।

ग्रहण के दौरान पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ने से उसका रंग लालिमा लिए दिखाई दे सकता है। यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए मौसम साफ रहने पर लोग इसे बिना किसी विशेष उपकरण के नंगी आंखों से देख सकेंगे।

शहरों के अनुसार 3 मार्च 2026 को ग्रहण दिखाई देने का समय इस प्रकार है—
दिल्ली में शाम 6:22 बजे, नोएडा में 6:26 बजे और लखनऊ में 6:02 बजे।
चंडीगढ़ में 6:27 बजे और कानपुर में 6:14 बजे ग्रहण दिखेगा।
वाराणसी में 6:04 बजे और पटना में 5:44 बजे दृश्यता शुरू होगी।
कोलकाता में 5:32 बजे और भुवनेश्वर में 5:54 बजे ग्रहण दिखाई देगा।

पूर्वोत्तर भारत में गुवाहाटी और शिलांग में 5:27 बजे, इंफाल में 5:18 बजे, कोहिमा में 5:17 बजे और ईटानगर में 5:07 बजे ग्रहण देखा जा सकेगा।

मध्य और पश्चिम भारत में भोपाल में 6:21 बजे, इंदौर में 6:35 बजे, मुंबई में 6:42 बजे और पुणे में 6:45 बजे ग्रहण दिखाई देगा।

दक्षिण भारत में चेन्नई में 6:18 बजे, हैदराबाद में 6:26 बजे और बेंगलुरु में 6:28 बजे ग्रहण नजर आएगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल में होली के रंग खेलने जैसे कार्यों से परहेज किया जाता है। इसलिए रंगों वाली होली 4 मार्च को मनाई जाएगी, जबकि 3 मार्च की शाम ग्रहण समाप्त होने के बाद शुद्धिकरण संबंधी अनुष्ठान किए जाएंगे।

खगोलविदों के अनुसार चंद्र ग्रहण को देखने के लिए किसी विशेष चश्मे की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि यह सुरक्षित होता है। साफ आसमान रहने पर यह खगोलीय घटना देशभर में लोगों का खास आकर्षण बनेगी।

अस्वीकरण: ग्रहण से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान और मान्यताएं अलग-अलग परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। पाठक अपने विश्वास और स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार मार्गदर्शन लें।

Leave a Reply