नई दिल्ली, 30 सितंबर 2025 — भारत का एक प्रमुख और अत्यंत उल्लासपूर्ण पर्व दशहरा अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक है। पूरे देश में यह पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है और भगवान राम तथा देवी दुर्गा के अद्भुत पराक्रम और वीरता को याद करता है। वर्ष 2025 में कई लोग यह जानना चाहते हैं कि दशहरा 1 अक्टूबर या 2 अक्टूबर को पड़ेगा।
दशहरा 2025 की तिथि
इस वर्ष दशहरा गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। तिथि को लेकर भ्रम इसलिए होता है क्योंकि हिंदू पंचांग की दशमी तिथि 1 अक्टूबर शाम 7:01 बजे से शुरू होकर 2 अक्टूबर शाम 7:10 बजे तक रहेगी। चूंकि दशमी तिथि का अधिकांश भाग और सबसे शुभ मुहूर्त 2 अक्टूबर को पड़ता है, इसलिए पर्व इस दिन ही मनाया जाएगा।
विजयादशमी के महत्वपूर्ण समय और शुभ मुहूर्त
दृक पंचांग और ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार:
- विजय मुहूर्त: 2 अक्टूबर, दोपहर 2:09 बजे से 2:57 बजे तक
- अपराह्न पूजा: 2 अक्टूबर, 1:21 बजे से 3:45 बजे तक
- दशमी तिथि: 1 अक्टूबर शाम 7:01 बजे से 2 अक्टूबर शाम 7:10 बजे तक
- श्रवण नक्षत्र: 2 अक्टूबर सुबह 9:13 बजे से 3 अक्टूबर सुबह 9:34 बजे तक
भक्तों को इस दौरान रीतियों का पालन और रावण दहन करने की सलाह दी जाती है ताकि आध्यात्मिक लाभ अधिकतम मिल सके।
दशहरे का गहरा महत्व
दशहरे का दोहरा महत्व है। यह भगवान राम की रावण पर विजय और देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय को स्मरण कराता है।
- राम की विजय: रावण ने राम की पत्नी सीता का हरण कर लिया था। राम ने अपने भाई लक्ष्मण, भक्त हनुमान और वानर सेना की मदद से दशमी तिथि को रावण का वध किया। यह अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है।
- दुर्गा की विजय: नौ दिनों तक नवरात्रि में देवी दुर्गा ने महिषासुर पर विजय पाई। पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में इसे विशेष रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है, जैसे सिंदूर खेला, धुनुची नृत्य, और दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन।
दशहरा कैसे मनाया जाता है
पूरे भारत में दशहरा सांस्कृतिक उल्लास से भरा दिन होता है। रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाथ के पुतलों का दहन बुराई के नाश का प्रतीक है। लोग रामलीला के मंचन में भाग लेते हैं, नए कार्यों की शुरुआत करते हैं, वाहन और उपकरण पूजन करते हैं और सामुदायिक आयोजनों में शामिल होते हैं। यह पर्व धर्म की रक्षा और अपने जीवन से नकारात्मकता को दूर करने की प्रेरणा देता है।


