दिल्ली में स्कूलों को लगातार मिल रही बम धमकियां, पुलिस ने शुरू की तलाशी

by cityplusnews · August 21, 2025
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दिल्ली में बम धमाकों की झूठी धमकियों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार सुबह राजधानी के छह स्कूलों को ईमेल के जरिए बम की धमकी दी गई। यह इस हफ्ते का तीसरा ऐसा मामला है। दिल्ली फायर सर्विस के मुताबिक धमकी भरे मेल सुबह 6:35 बजे से 8 बजे के बीच भेजे गए।

अधिकारियों ने जिन स्कूलों को निशाना बनाया गया, उनमें आंध्रा एजुकेशन सोसायटी सीनियर सेकेंडरी स्कूल (प्रसाद नगर), बीजीएस इंटरनेशनल स्कूल (द्वारका), राव मानसिंह सीनियर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल (नजफगढ़), कॉन्वेंट स्कूल (नजफगढ़), मैक्स फोर्ट स्कूल (द्वारका) और इंद्रप्रस्थ इंटरनेशनल स्कूल (द्वारका) शामिल हैं।

घटना की जानकारी मिलते ही दिल्ली पुलिस, बम निरोधक दस्ते और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई और तलाशी अभियान शुरू किया। खास बात यह है कि आंध्रा स्कूल को दूसरी बार ऐसी धमकी मिली है।

इससे पहले सोमवार को दिल्ली के 30 से अधिक स्कूलों को इसी तरह की धमकियां मिली थीं, जो बाद में फर्जी साबित हुईं। वहीं बुधवार को करीब 50 स्कूलों को धमकी भरे ईमेल भेजे गए, जिन्हें भी पुलिस ने होक्स (झूठा अलर्ट) घोषित किया।

पुलिस जांच में सामने आया है कि मेल भेजने वालों ने वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का इस्तेमाल किया है ताकि उनकी पहचान छिपी रहे और ट्रैक करना मुश्किल हो।

दिल्ली पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले साल राजधानी में बम धमकी से जुड़े 25 मामले दर्ज हुए थे, जिनमें से कुछ ही हल हो पाए। इस साल अभी तक सिर्फ एक मामले को सुलझाया गया है, जबकि अब तक पांच बार स्कूलों को धमकी वाले मेल मिल चुके हैं।

पिछले साल दिसंबर में पुलिस ने एक छात्र को पकड़ा था जिसने परीक्षा से बचने के लिए अपने ही स्कूल को बम की धमकी वाला ईमेल भेजा था। छात्र ने बिना VPN इस्तेमाल किए साधारण ईमेल से मेल किया था, जिससे पुलिस ने आसानी से उसे ट्रेस कर लिया। बाद में उसे काउंसलिंग के बाद छोड़ दिया गया।

वहीं, इस साल जुलाई में जांच में पता चला कि एक 12 साल के छात्र ने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज और द्वारका स्थित सेंट थॉमस स्कूल को फर्जी धमकी भेजी थी। नाबालिग को हिरासत में लेने के बाद काउंसलिंग कर छोड़ दिया गया।

काउंसलिंग के दौरान कक्षा 8 के उस छात्र ने खुलासा किया कि वह स्कूल बंद करवाना चाहता था और उसने यूं ही अलग-अलग संस्थानों के ईमेल आईडी जोड़ दिए थे। इस मामले में भी बच्चे ने VPN का इस्तेमाल नहीं किया था।

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