After Gold & Silver Dip, Investors Face Dilemma: What Does the Gold-Silver Ratio Indicate?
हाल ही में 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद सोना और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है, जिससे निवेशक असमंजस में हैं कि अब किस धातु में निवेश किया जाए। जहां चांदी में ज्यादा गिरावट आई है, वहीं सोना अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है। ऐसे में गोल्ड-सिल्वर रेशियो निवेशकों के लिए एक अहम संकेतक बनकर उभरता है।
गोल्ड-सिल्वर रेशियो एक सरल फॉर्मूला है, जिससे दोनों धातुओं की आपसी वैल्यू का अंदाजा लगाया जाता है:
सोने की कीमत (प्रति 10 ग्राम) ÷ चांदी की कीमत (प्रति 10 ग्राम)
ताजा कीमतों के अनुसार, सोना करीब ₹1.53 लाख प्रति 10 ग्राम है, जबकि चांदी लगभग ₹2,435 प्रति 10 ग्राम (₹2.43 लाख प्रति किलो) है। इस हिसाब से रेशियो लगभग 63 के आसपास बनता है।
इस साल जनवरी में यह रेशियो 46–47 के स्तर पर था, जो यह दिखाता था कि उस समय चांदी अपेक्षाकृत महंगी थी। अब रेशियो बढ़कर 63–65 तक पहुंच गया है, जिससे संकेत मिलता है कि सोना अब ज्यादा आकर्षक नजर आ रहा है और चांदी में ज्यादा करेक्शन हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्तर 60–70 के लंबे समय के औसत दायरे में आता है, जिसे एक न्यूट्रल जोन माना जाता है। इसका मतलब है कि फिलहाल न तो सोना बहुत सस्ता है और न ही चांदी बहुत महंगी। ऐसे में किसी एक धातु में आक्रामक निवेश करना सही रणनीति नहीं हो सकती।
इसके बजाय, संतुलित निवेश की सलाह दी जा रही है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा स्थिति में निवेशकों को अपने प्रेशियस मेटल पोर्टफोलियो में लगभग 60–65% सोना और 35–40% चांदी रखना चाहिए। इससे स्थिरता और ग्रोथ दोनों का फायदा मिल सकता है।
गोल्ड-सिल्वर रेशियो भविष्य के फैसलों में भी मदद करता है। अगर यह रेशियो 70 या उससे ऊपर जाता है, तो सोने में निवेश बढ़ाने का मौका हो सकता है। वहीं, अगर यह 55–60 के आसपास आता है, तो यह संकेत हो सकता है कि चांदी महंगी हो गई है और निवेशकों को सोने की ओर झुकाव करना चाहिए।
हालांकि, इस रेशियो का उपयोग शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग के लिए नहीं करना चाहिए। यह लंबे समय में पोर्टफोलियो को संतुलित करने का एक बेहतर टूल है। जो निवेशक धीरे-धीरे बदलाव करते हैं, वे ज्यादा फायदा उठा सकते हैं।
सोना और चांदी की भूमिका भी अलग-अलग होती है। सोना आमतौर पर अनिश्चितता के समय सुरक्षित निवेश माना जाता है, जबकि चांदी का प्रदर्शन औद्योगिक मांग और आर्थिक सुधार के दौरान बेहतर रहता है।
फिलहाल, जब रेशियो ऐतिहासिक औसत के आसपास है, निवेशकों को बड़े दांव लगाने के बजाय संतुलन बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए और इस रेशियो को एक गाइड की तरह इस्तेमाल करना चाहिए, न कि गारंटी की तरह।
डिस्क्लेमर: निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले वित्तीय विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
