January 19, 2026
Why Seeing the Neelkanth Bird on Dussehra is Considered Auspicious

Why Seeing the Neelkanth Bird on Dussehra is Considered Auspicious

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दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है, भारत में अच्छाई की बुराई पर जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को लेकर कई धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएँ प्रचलित हैं, जिनमें से एक प्रमुख मान्यता है – दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी (भारतीय रोलर) के दर्शन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

नीलकंठ पक्षी और भगवान शिव का संबंध

नीलकंठ पक्षी का नाम भगवान शिव के ‘नीलकंठ’ (नीले गले वाले) रूप से लिया गया है। पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन से निकला विष भगवान शिव ने अपने गले में धारण किया, जिससे उनका गला नीला हो गया। इसलिए, नीलकंठ पक्षी को भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है।

रामायण में नीलकंठ पक्षी का संकेत

मान्यता है कि जब भगवान श्रीराम लंका जाने से पहले नीलकंठ पक्षी के दर्शन किए थे, तो इसे विजय का संकेत और दिव्य आशीर्वाद माना गया। तभी से यह परंपरा बन गई कि दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन से घर में सुख-समृद्धि और सफलता आती है।

नीलकंठ पक्षी के दर्शन के लाभ

  • सुख-समृद्धि की प्राप्ति: नीलकंठ पक्षी के दर्शन से घर में लक्ष्मी का वास होता है।
  • विघ्नों का नाश: यह माना जाता है कि नीलकंठ पक्षी के दर्शन से जीवन में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं।
  • दिव्य आशीर्वाद: भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन में सकारात्मकता आती है।

परंपरा और संरक्षण

विभिन्न क्षेत्रों में लोग दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन के लिए प्रातःकाल उठकर प्रयास करते हैं। कुछ स्थानों पर तो इन पक्षियों को पालने और उनकी देखभाल की परंपरा भी रही है। हालांकि, आजकल इनके संरक्षण की आवश्यकता महसूस की जा रही है, क्योंकि पर्यावरणीय बदलाव और मानव गतिविधियों के कारण इनकी संख्या में कमी आई है।

इसलिए, नीलकंठ पक्षी के दर्शन को न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह हमें प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

इस दशहरे पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन से आपके जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता का वास हो।

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