Personal Loan Agreement: Key Things to Check Before Signing
पर्सनल लोन लेते समय ज़्यादातर लोग सिर्फ़ लोन की राशि, ब्याज दर और EMI पर ध्यान देते हैं। लेकिन इसके अलावा भी कई महत्वपूर्ण शर्तें और नियम होते हैं, जिनके बारे में जानना ज़रूरी है। ये सभी जानकारी पर्सनल लोन एग्रीमेंट (समझौता पत्र) में लिखी होती है। इस लेख में हम समझेंगे कि पर्सनल लोन एग्रीमेंट में क्या-क्या ज़रूर जांचना चाहिए।
पर्सनल लोन एग्रीमेंट क्या है?
पर्सनल लोन एग्रीमेंट एक कानूनी दस्तावेज़ है जो बैंक और उधार लेने वाले (borrower) के बीच साइन किया जाता है। इसमें लोन की राशि, ब्याज दर, अवधि, EMI, शुल्क, बैंक और बॉरोवर के अधिकार व ज़िम्मेदारियां आदि का विवरण होता है।
यह दस्तावेज़ दोनों पक्षों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी होता है और किसी भी तरह की अस्पष्टता या विवाद की संभावना कम कर देता है। इसलिए साइन करने से पहले इसे ध्यान से पढ़ना ज़रूरी है।
पर्सनल लोन एग्रीमेंट में किन बातों की जांच करें?
1. लोन राशि, ब्याज दर और अवधि
एग्रीमेंट में लोन की राशि, बैंक द्वारा ली जाने वाली ब्याज दर और लोन की अवधि स्पष्ट रूप से लिखी होती है। इन्हीं के आधार पर EMI तय होती है।
इसमें EMI शेड्यूल, हर महीने EMI कटने की तारीख और लोन खत्म होने की अंतिम तारीख का भी उल्लेख होता है।
2. प्रोसेसिंग फीस
बैंक और NBFC लोन प्रोसेस करने के लिए प्रोसेसिंग फीस लेते हैं, जो लोन राशि से काटी जा सकती है।
यह फीस आमतौर पर लोन राशि का एक प्रतिशत होती है और गैर-वापसी योग्य (नॉन-रिफंडेबल) होती है।
उदाहरण के लिए:
- IDFC FIRST Bank – 2% प्रोसेसिंग फीस
- Kotak Bank – अधिकतम 5% प्रोसेसिंग फीस (लोन डिस्बर्सल के समय काटी जाती है)
एग्रीमेंट में प्रोसेसिंग फीस की सही जानकारी देखकर उसे असल शुल्क से मिलान करना चाहिए।
3. पार्ट प्रीपेमेंट और फोरक्लोज़र शुल्क
अगर आपके पास अतिरिक्त पैसा है, तो आप लोन की आंशिक अग्रिम अदायगी (पार्ट प्रीपेमेंट) या पूरा लोन एक साथ चुका सकते हैं (फोरक्लोज़र)।
इसके लिए बैंक अक्सर एक निश्चित शुल्क लेते हैं, जो प्रतिशत या तय राशि हो सकती है।
उदाहरण:
- Kotak Bank में पार्ट प्रीपेमेंट – बकाया राशि का 20% तक, 12 महीने बाद, साल में एक बार; शुल्क ₹500 + टैक्स प्रति बार।
- फोरक्लोज़र शुल्क – बकाया राशि पर पहले 3 साल तक 4% + टैक्स, 3 साल बाद 2% + टैक्स।
एग्रीमेंट में यह जानकारी ज़रूर चेक करें कि प्रीपेमेंट कब, कितनी बार और कितनी राशि तक किया जा सकता है, और शुल्क कितना है।
पर्सनल लोन एग्रीमेंट का महत्व
- यह बैंक और उधार लेने वाले के बीच कानूनी संबंध स्थापित करता है।
- इसमें सभी शर्तें लिखी होने से विवाद की संभावना कम होती है।
- विवाद होने पर इसमें न्याय क्षेत्र (जूरिस्डिक्शन) और विवाद निपटान की प्रक्रिया का भी उल्लेख होता है।
ज़िम्मेदारी से लें पर्सनल लोन
पर्सनल लोन आपात स्थिति जैसे मेडिकल इमरजेंसी, घर की मरम्मत, त्योहार या पारिवारिक अवसर पर मददगार हो सकता है। लेकिन लोन लेने से पहले उसकी सभी शर्तें समझना और एग्रीमेंट ध्यान से पढ़ना बेहद ज़रूरी है।
इससे आप लोन को आसानी से चुका पाएंगे और मानसिक शांति बनाए रखेंगे।
Disclaimer(अस्वीकरण): यह लेख केवल जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से है। पर्सनल लोन में ब्याज दरें, शुल्क और अन्य जोखिम होते हैं। किसी भी प्रकार का क्रेडिट लेने से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।
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