8 Western Ghats Hill Stations That Are As Mesmerizing As the Himalayas
भारत की पश्चिमी घाट पर्वत श्रृंखला, जिसे सह्याद्रि पर्वतमाला भी कहा जाता है, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। यह महाराष्ट्र से लेकर केरल तक लगभग 1,600 किलोमीटर लंबाई में फैली हुई है। यह क्षेत्र न सिर्फ अपनी जैव-विविधता और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ के हिल स्टेशन हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
अक्सर लोग मानते हैं कि पहाड़ी छुट्टियाँ सिर्फ हिमालय में ही पूरी हो सकती हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि पश्चिमी घाट के हिल स्टेशन भी उतने ही मनोरम और शांति देने वाले हैं। यहाँ की पहाड़ियाँ, हरियाली, झरने और सुहावना मौसम आपको हिमालय जैसा अनुभव कराते हैं, बस बिना लंबी दूरी तय किए।
1. मुनार, केरला

- खूबसूरती: मुनार चाय बागानों से ढकी वादियों और कोहरे में लिपटी पहाड़ियों के लिए मशहूर है।
- घूमने की जगहें: एराविकुलम नेशनल पार्क, टॉप स्टेशन, अट्टुकल वॉटरफॉल्स।
- सही समय: सितंबर से मार्च।
- कैसे पहुँचे: नजदीकी एयरपोर्ट कोचीन है (लगभग 110 किमी), वहीं से टैक्सी या बस से पहुँचा जा सकता है।
- खासियत: ताज़ी चाय की खुशबू और दक्षिण भारतीय व्यंजन का असली स्वाद।
- ठहरने के विकल्प: लग्ज़री रिसॉर्ट से लेकर बजट होमस्टे तक उपलब्ध।
2. ऊटी, तमिलनाडु

- खूबसूरती: ‘नीलगिरि की रानी’ कहे जाने वाले ऊटी का मौसम सालभर सुहावना रहता है।
- घूमने की जगहें: बोटैनिकल गार्डन, ऊटी लेक, रोज गार्डन और डोडाबेट्टा पीक।
- सही समय: अप्रैल से जून और सितंबर से दिसंबर।
- कैसे पहुँचे: नजदीकी एयरपोर्ट कोयंबटूर (लगभग 88 किमी)। ऊटी तक नीलगिरि माउंटेन रेलवे की खिलौना ट्रेन भी चलती है।
- खासियत: ऊटी की चॉकलेट और चाय बेहद प्रसिद्ध हैं।
- ठहरने के विकल्प: औपनिवेशिक स्टाइल बंगलो से लेकर आधुनिक होटल।
3. कोडाईकानाल, तमिलनाडु

- खूबसूरती: ‘प्रिंसेस ऑफ हिल स्टेशन’ कहा जाने वाला यह शहर झीलों और वादियों के लिए जाना जाता है।
- घूमने की जगहें: कोडाई लेक, कोकर’स वॉक, पिलर रॉक्स और सिल्वर कैस्केड फॉल्स।
- सही समय: मार्च से जून और सितंबर से नवंबर।
- कैसे पहुँचे: नजदीकी एयरपोर्ट मदुरै (लगभग 120 किमी)।
- खासियत: यहाँ मिलने वाला कुरिंजी फूल, जो 12 साल में एक बार खिलता है।
- ठहरने के विकल्प: शांत वातावरण वाले होमस्टे और लेक व्यू रिसॉर्ट।
4. महाबलेश्वर, महाराष्ट्र

- खूबसूरती: स्ट्रॉबेरी फार्म और व्यू पॉइंट्स से दिखने वाली घाटियाँ।
- घूमने की जगहें: आर्थर सीट, वेन्ना लेक, प्रतापगढ़ किला और मैपरो गार्डन।
- सही समय: अक्टूबर से जून।
- कैसे पहुँचे: नजदीकी शहर पुणे (120 किमी), वहीं से टैक्सी या बस से।
- खासियत: यहाँ की स्ट्रॉबेरी और कॉर्न पकौड़े प्रसिद्ध हैं।
- ठहरने के विकल्प: बजट होटल से लेकर स्ट्रॉबेरी फार्म पर बने कॉटेज।
5. लोनावाला और खंडाला, महाराष्ट्र

- खूबसूरती: मॉनसून के मौसम में यह जगह स्वर्ग सी लगती है।
- घूमने की जगहें: भुशी डैम, राजमाची किला, टाइगर पॉइंट।
- सही समय: जुलाई से सितंबर (मॉनसून)।
- कैसे पहुँचे: मुंबई और पुणे से ट्रेन व कार द्वारा आसानी से।
- खासियत: लोनावाला की चिकी हर पर्यटक खरीदता है।
- ठहरने के विकल्प: रिसॉर्ट, होटल और लक्ज़री विला।
6. कूर्ग (कोडागू), कर्नाटक

- खूबसूरती: ‘भारत का स्कॉटलैंड’ कहे जाने वाले कूर्ग की घाटियाँ कॉफी की महक से भरी रहती हैं।
- घूमने की जगहें: एब्बी फॉल्स, दुबारे एलिफैंट कैंप, राजा की सीट।
- सही समय: अक्टूबर से मार्च।
- कैसे पहुँचे: मैसूर एयरपोर्ट सबसे नजदीक (120 किमी)।
- खासियत: कॉफी और मसालों की खेती।
- ठहरने के विकल्प: लक्ज़री होमस्टे और जंगल रिसॉर्ट।
7. वायनाड, केरला

- खूबसूरती: यह जगह इतिहास, जंगल और पहाड़ तीनों का संगम है।
- घूमने की जगहें: एडकल गुफाएँ, बाणासुर डैम, चेम्ब्रा पीक।
- सही समय: अक्टूबर से मई।
- कैसे पहुँचे: कोझिकोड एयरपोर्ट (65 किमी)।
- खासियत: बांस के जंगल और मसालों के बागान।
- ठहरने के विकल्प: इको-फ्रेंडली होमस्टे और ट्री हाउस।
8. चिकमगलूर, कर्नाटक

- खूबसूरती: कॉफी का जन्मस्थान कहलाने वाला चिकमगलूर सुबह-सुबह धुंध में बेहद खूबसूरत लगता है।
- घूमने की जगहें: मुल्लायनगिरी पीक, बाबा बुदनगिरी, हिब्बे फॉल्स।
- सही समय: सितंबर से मार्च।
- कैसे पहुँचे: बेंगलुरु एयरपोर्ट (240 किमी), वहाँ से टैक्सी।
- खासियत: कॉफी टूर और स्थानीय व्यंजन।
- ठहरने के विकल्प: लक्ज़री कॉफी एस्टेट होमस्टे और रिसॉर्ट।
निष्कर्ष
पश्चिमी घाट के ये आठ हिल स्टेशन किसी भी तरह हिमालय से कम नहीं। यहाँ प्रकृति का जादू, ताज़गी और शांति सब कुछ मिलता है। अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं, वीकेंड ट्रिप करना चाहते हैं या एक लंबी छुट्टी प्लान कर रहे हैं, तो इनमें से कोई भी गंतव्य आपके सफर को अविस्मरणीय बना देगा।
