TRAI Moves To Regulate Free TV Streaming On Smart TVs; New Rules Likely Soon

TRAI Moves To Regulate Free TV Streaming On Smart TVs; New Rules Likely Soon

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भारत में स्मार्ट टीवी पर फ्री टीवी स्ट्रीमिंग सेवाओं की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) ने इन्हें रेगुलेट करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रेगुलेटर ने एक कंसल्टेशन पेपर जारी कर इन सेवाओं के लिए एक स्पष्ट ढांचा तैयार करने का प्रस्ताव रखा है।

सस्ते इंटरनेट और स्मार्ट टीवी के बढ़ते उपयोग के कारण Free Ad-Supported Streaming Television (FAST) प्लेटफॉर्म्स भारत में तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। ये प्लेटफॉर्म यूजर्स को बिना किसी सब्सक्रिप्शन के मुफ्त में चैनल देखने की सुविधा देते हैं।

FAST और ALTD सेवाएं क्या हैं?

FAST प्लेटफॉर्म इंटरनेट के जरिए लाइव टीवी चैनलों की तरह शेड्यूल्ड कंटेंट उपलब्ध कराते हैं और इनकी कमाई विज्ञापनों से होती है।

TRAI ने इन्हें एक व्यापक कैटेगरी Application-Based Linear Television Distribution (ALTD) के तहत लाने का प्रस्ताव दिया है। इसमें वे सभी प्लेटफॉर्म शामिल होंगे जो इंटरनेट ऐप्स के जरिए टीवी चैनल उपलब्ध कराते हैं—चाहे वे फ्री हों या पेड।


TRAI क्यों करना चाहता है रेगुलेशन?

यह कदम पारंपरिक केबल और DTH ऑपरेटर्स की शिकायतों के बाद उठाया गया है। उनका कहना है कि FAST प्लेटफॉर्म्स बिना किसी नियम के काम कर रहे हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा असमान हो गई है।

फिलहाल ये प्लेटफॉर्म:

  • किसी लाइसेंस की जरूरत नहीं रखते
  • कंटेंट और विज्ञापन नियमों का सख्ती से पालन नहीं करते
  • कोई स्पष्ट शिकायत निवारण प्रणाली नहीं रखते

TRAI का मानना है कि ये सेवाएं पारंपरिक टीवी की तरह ही काम कर रही हैं, लेकिन बिना किसी नियामक निगरानी के।


मुख्य चिंताएं क्या हैं?

रेगुलेटर ने कई अहम मुद्दों की पहचान की है:

  • बिना अनुमति के चैनल स्ट्रीम होने की आशंका
  • पेड टीवी कंटेंट का फ्री में उपलब्ध होना
  • मल्टी-लेयर ऐप सिस्टम में जवाबदेही की कमी
  • कंटेंट और विज्ञापन के लिए एक समान नियमों का अभाव

साथ ही, अलग-अलग ऑपरेटिंग मॉडल—जैसे स्मार्ट टीवी ब्रांड्स के अपने प्लेटफॉर्म, थर्ड-पार्टी ऐप्स और OS-आधारित एग्रीगेटर्स—ने रेगुलेशन को और जटिल बना दिया है।


क्या बदलाव हो सकते हैं?

TRAI इन प्लेटफॉर्म्स को केबल और DTH की तरह लाइसेंस या ऑथराइजेशन फ्रेमवर्क के तहत लाने पर विचार कर रहा है। इससे:

  • प्लेटफॉर्म्स को लाइसेंस लेना अनिवार्य हो सकता है
  • कंटेंट और विज्ञापन नियमों का पालन करना होगा
  • कंटेंट के लिए स्पष्ट जिम्मेदारी तय होगी
  • शिकायत निवारण की मानकीकृत व्यवस्था बनेगी

रेगुलेटर यह भी तय कर रहा है कि जब कंटेंट वितरण में कई पक्ष शामिल हों, तो जिम्मेदारी किसकी होगी।


कंसल्टेशन और समयसीमा

TRAI ने इस प्रस्ताव पर स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे हैं।

  • प्रतिक्रिया देने की अंतिम तिथि: 4 मई
  • काउंटर-कमेंट की अंतिम तिथि: 18 मई

फीडबैक के बाद नई नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा, जो भारत में फ्री स्ट्रीमिंग सेवाओं के काम करने के तरीके को बदल सकती है।


दर्शकों पर क्या असर पड़ेगा?

यूजर्स के लिए यह कदम कंटेंट की गुणवत्ता, सुरक्षा और पारदर्शिता को बेहतर बना सकता है। हालांकि, इससे कंटेंट पर कुछ नियंत्रण भी बढ़ सकता है और प्लेटफॉर्म्स के संचालन के तरीके में बदलाव आ सकता है।


निष्कर्ष

यह कदम दर्शाता है कि भारत में इंटरनेट-आधारित टीवी सेवाओं को अब पारंपरिक ब्रॉडकास्टिंग नियमों के दायरे में लाया जा रहा है। इससे एक संतुलित और व्यवस्थित मीडिया इकोसिस्टम बनाने में मदद मिल सकती है।

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